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संकल्प पीड़ा से महाभारत पर डाला प्रकाश
Updated Sat, 05 May 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
प्रयास जागरूकता मंच की ओर से लेखक कुलबीर पराशर के नाटक संकल्प पीड़ा का मंचन किया गया। जिसमें कलाकारों ने महाभारत का शुरूआती प्रसंग दर्शाया। नाटक का निर्देशन रंगकर्मी और निर्देशक विशाल सावन ने किया।
शुक्रवार को नगर निगम प्रेक्षागृह में नाटक संकल्प पीड़ा का मंचन किया गया। जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार जितेन ठाकुर और विशिष्ट अतिथि भाजपा प्रदेश सचिव सुनील उनियाल गामा ने किया। नाटक में महाभारत का शुरूआती प्रसंग दर्शाया गया। नाटक में दर्शाया गया कि कैसे भीष्म पितामह से वचनबद्ध हो जाने से वंशवृद्धि संकट उभर कर आया। नाटक भीष्म पितामह के वचनबद्ध हो जाने से माता सत्यवती उनकी पुत्र वधुओं अम्बिका, अंबालिका एवं उनके पुत्र वेद व्यास के अर्न्तद्वन्द एवं मानसिक पीड़ा को दर्शाता है। वहीं दूसरी तरफ अम्बिका एवं अम्बालिका के रूप में समस्त नारी जगत की पीड़ा को भी उजागर करता है। जो दयनीय स्थिति द्वापर काल में थी वही स्थिति यथावत आज भी है, बस बदला है तो समय, काल, परिस्थितियां। इस मौके पर भारती सूर्यान, विनोद शर्मा, सागर गुसाई, विशाल सावन, नीतिश आदि मौजूद रहे।
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प्रयास जागरूकता मंच की ओर से लेखक कुलबीर पराशर के नाटक संकल्प पीड़ा का मंचन किया गया। जिसमें कलाकारों ने महाभारत का शुरूआती प्रसंग दर्शाया। नाटक का निर्देशन रंगकर्मी और निर्देशक विशाल सावन ने किया।
शुक्रवार को नगर निगम प्रेक्षागृह में नाटक संकल्प पीड़ा का मंचन किया गया। जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार जितेन ठाकुर और विशिष्ट अतिथि भाजपा प्रदेश सचिव सुनील उनियाल गामा ने किया। नाटक में महाभारत का शुरूआती प्रसंग दर्शाया गया। नाटक में दर्शाया गया कि कैसे भीष्म पितामह से वचनबद्ध हो जाने से वंशवृद्धि संकट उभर कर आया। नाटक भीष्म पितामह के वचनबद्ध हो जाने से माता सत्यवती उनकी पुत्र वधुओं अम्बिका, अंबालिका एवं उनके पुत्र वेद व्यास के अर्न्तद्वन्द एवं मानसिक पीड़ा को दर्शाता है। वहीं दूसरी तरफ अम्बिका एवं अम्बालिका के रूप में समस्त नारी जगत की पीड़ा को भी उजागर करता है। जो दयनीय स्थिति द्वापर काल में थी वही स्थिति यथावत आज भी है, बस बदला है तो समय, काल, परिस्थितियां। इस मौके पर भारती सूर्यान, विनोद शर्मा, सागर गुसाई, विशाल सावन, नीतिश आदि मौजूद रहे।
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