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एकल कृषि पर केंद्रित हो गए किसान - शाह
Updated Thu, 29 Mar 2018 02:28 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
हैस्को और यूसर्क की ओर से हैस्को ग्राम शुक्लापुर में राज्य में पारिस्थितिकी सेवाओं के मूल्यांकन विषय पर आयोजित कार्यशाला में पारंपरिक फसल चक्र को लेकर चिंता जताई गई। मुख्य अतिथि उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड के चेयरमैन डॉ.राकेश शाह ने कहा कि बदलते दौर में कृषि विविधता खत्म होती जा रही है। हमने पारंपरिक फसल चक्र को खो दिया है और किसान एकल कृषि पर केंद्रित हो गए हैं। इससे कृषि विविधता खत्म हो रही है। यही वजह है कि दून की प्रसिद्ध बासमती खात्मे की कगार पर है।
विशिष्ट अतिथि सांख्यिकी निदेशालय के संयुक्त निदेशक डॉ.मनोज पंत ने राज्य बनने से अब तक की घटती खेती, उसके कारणों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गांवों से बढ़ते पलायन के पीछे शिक्षा एवं रोजगार मुख्य कारण हैं। पद्मश्री डॉ.अनिल जोशी ने कहा कि पिछले 200 वर्षों में विलासिता को आवश्यकता बनाकर जो विकास के मापदंड तय किए गए, वही आज हमारे लिए एक बड़े संकट के रूप में सामने आ गए हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर सेवाएं तभी संभव होंगी, जब हवा, मिट्टी, जंगल और पानी को बेहतर स्तर पर रखने की कोशिश बनी रहे। कार्यशाला का संचालन डॉ.सुभाष नौटियाल ने किया। इस अवसर पर डॉ.रुचि बडोला, डॉ.भावतोष, डॉ.मीनाक्षी वालिया, डॉ.राकेश कुमार, डॉ.किरन नेगी, डॉ.सेश विश्वास आदि मौजूद रहे।
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हैस्को और यूसर्क की ओर से हैस्को ग्राम शुक्लापुर में राज्य में पारिस्थितिकी सेवाओं के मूल्यांकन विषय पर आयोजित कार्यशाला में पारंपरिक फसल चक्र को लेकर चिंता जताई गई। मुख्य अतिथि उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड के चेयरमैन डॉ.राकेश शाह ने कहा कि बदलते दौर में कृषि विविधता खत्म होती जा रही है। हमने पारंपरिक फसल चक्र को खो दिया है और किसान एकल कृषि पर केंद्रित हो गए हैं। इससे कृषि विविधता खत्म हो रही है। यही वजह है कि दून की प्रसिद्ध बासमती खात्मे की कगार पर है।
विशिष्ट अतिथि सांख्यिकी निदेशालय के संयुक्त निदेशक डॉ.मनोज पंत ने राज्य बनने से अब तक की घटती खेती, उसके कारणों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गांवों से बढ़ते पलायन के पीछे शिक्षा एवं रोजगार मुख्य कारण हैं। पद्मश्री डॉ.अनिल जोशी ने कहा कि पिछले 200 वर्षों में विलासिता को आवश्यकता बनाकर जो विकास के मापदंड तय किए गए, वही आज हमारे लिए एक बड़े संकट के रूप में सामने आ गए हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर सेवाएं तभी संभव होंगी, जब हवा, मिट्टी, जंगल और पानी को बेहतर स्तर पर रखने की कोशिश बनी रहे। कार्यशाला का संचालन डॉ.सुभाष नौटियाल ने किया। इस अवसर पर डॉ.रुचि बडोला, डॉ.भावतोष, डॉ.मीनाक्षी वालिया, डॉ.राकेश कुमार, डॉ.किरन नेगी, डॉ.सेश विश्वास आदि मौजूद रहे।
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