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अटलजी की अस्थियां गंगा में विसर्जित
Updated Mon, 20 Aug 2018 12:52 AM IST
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हरिद्वार। पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां रविवार को हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड में प्रवाहित कर दी गई। इस दौरान देश के प्रिय नेता को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे। अस्थियां विसर्जित करते समय उनके परिजनों की आंखें नम हो गई। इससे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र रावत समेत कई वरिष्ठ भाजपा नेता अस्थि कलश यात्रा कर हरकी पैडी पहुंचे।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि कलश लेकर उनके दामाद रंजन भट्टाचार्य, दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य, नातिन निहारिका, भांजे अनूप मिश्रा और लंबे समय तक वाजपेयी के राजनीतिक सलाहकार एवं निजी सचिव रहे शिवकुमार शर्मा आदि परिजनों के साथ भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचा। एयरपोर्ट से अटलीजी का अस्थि कलश लेकर हेलीकाप्टर से परिजन और भाजपा नेता भल्ला कालेज स्थित स्टेडियम में पहुंचे। हेलीपेड पर भाजपा के प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और सतपाल महाराज आदि की अगुवाई में भाजपा कार्यकर्ताओं ने अस्थि कलश को फूलों से सजाए गए वाहन में रखा। यहां से यात्रा के रूप में अस्थि कलश को रेलवे रोड, अपर रोड होते हुए हरकी पैड़ी ले जाया गया। वाजपेयी परिवार के तीर्थ पुरोहित हरिहर शास्त्री के पोते पंडित अखिलेश शास्त्री ने अपने साथी पुरोहित हरिओम जैवाल और आशीष गौतम आदि के साथ अस्थियों को गंगा में विसर्जित कराया। इससे पहले अस्थि कलश को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए गंगा सभा के कार्यालय के बाहर रखे गए। यहां उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली समेत अन्य क्षेत्रों से आए भाजपाइयों के अलावा विभिन्न दलों के राजनीतिक प्रतिनिधियों, संत समाज आदि ने दिवंगत अटलजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। रुड़की से आई बीईजी की सैन्य टुकड़ी ने अस्थि कलश को अंतिम सलामी दी। सुरक्षा के अभेद्य घेरे के बीच करीब डेढ़ घंटे तक हरकी पैड़ी को जीरो जोन बनाया गया था। यहां सघन चेकिंग के बाद लोगों को प्रवेश करने दिया गया।
भारी पड़ी अव्यवस्थाएं, बदलना पड़ा कार्यक्रम
हरिद्वार। अटल जी की अस्थि विसर्जन के कार्यक्रम को अनुशासित ढंग से संचालित करने के लिए भाजपा और स्थानीय प्रशासन की तीन दिन से चल रही कसरत आखिरी समय में जवाब दे गई। ऐन वक्त पर आयोजन स्थल पर ऐसी अव्यवस्थाएं फैली कि तय कार्यक्रम उससे प्रभावित होता दिखा। आयोजन स्थल पर बिना अनुमति कार्यकर्ताओं के घुसने से सात बार प्रशासन को जगह खाली करवानी पड़ी। आलम यह रहा कि आखिरी समय में आयोजन स्थल पर श्रद्धांजलि सभा टालनी पड़ी। इतना ही नहीं प्रमुख नेताओं के अटल जी को लेकर संक्षिप्त संबोधन भी नहीं हो सके।
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पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि कलश लेकर उनके दामाद रंजन भट्टाचार्य, दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य, नातिन निहारिका, भांजे अनूप मिश्रा और लंबे समय तक वाजपेयी के राजनीतिक सलाहकार एवं निजी सचिव रहे शिवकुमार शर्मा आदि परिजनों के साथ भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचा। एयरपोर्ट से अटलीजी का अस्थि कलश लेकर हेलीकाप्टर से परिजन और भाजपा नेता भल्ला कालेज स्थित स्टेडियम में पहुंचे। हेलीपेड पर भाजपा के प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और सतपाल महाराज आदि की अगुवाई में भाजपा कार्यकर्ताओं ने अस्थि कलश को फूलों से सजाए गए वाहन में रखा। यहां से यात्रा के रूप में अस्थि कलश को रेलवे रोड, अपर रोड होते हुए हरकी पैड़ी ले जाया गया। वाजपेयी परिवार के तीर्थ पुरोहित हरिहर शास्त्री के पोते पंडित अखिलेश शास्त्री ने अपने साथी पुरोहित हरिओम जैवाल और आशीष गौतम आदि के साथ अस्थियों को गंगा में विसर्जित कराया। इससे पहले अस्थि कलश को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए गंगा सभा के कार्यालय के बाहर रखे गए। यहां उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली समेत अन्य क्षेत्रों से आए भाजपाइयों के अलावा विभिन्न दलों के राजनीतिक प्रतिनिधियों, संत समाज आदि ने दिवंगत अटलजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। रुड़की से आई बीईजी की सैन्य टुकड़ी ने अस्थि कलश को अंतिम सलामी दी। सुरक्षा के अभेद्य घेरे के बीच करीब डेढ़ घंटे तक हरकी पैड़ी को जीरो जोन बनाया गया था। यहां सघन चेकिंग के बाद लोगों को प्रवेश करने दिया गया।
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भारी पड़ी अव्यवस्थाएं, बदलना पड़ा कार्यक्रम
हरिद्वार। अटल जी की अस्थि विसर्जन के कार्यक्रम को अनुशासित ढंग से संचालित करने के लिए भाजपा और स्थानीय प्रशासन की तीन दिन से चल रही कसरत आखिरी समय में जवाब दे गई। ऐन वक्त पर आयोजन स्थल पर ऐसी अव्यवस्थाएं फैली कि तय कार्यक्रम उससे प्रभावित होता दिखा। आयोजन स्थल पर बिना अनुमति कार्यकर्ताओं के घुसने से सात बार प्रशासन को जगह खाली करवानी पड़ी। आलम यह रहा कि आखिरी समय में आयोजन स्थल पर श्रद्धांजलि सभा टालनी पड़ी। इतना ही नहीं प्रमुख नेताओं के अटल जी को लेकर संक्षिप्त संबोधन भी नहीं हो सके।
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