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बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में बढ़े महिलाओं की भागीदारी
Updated Fri, 27 Apr 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
विश्व बौद्धिक संपदा दिवस पर बृहस्पतिवार को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के विज्ञान धाम परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि महिला प्रौद्योगिकी संस्थान की निदेशक डॉ. अलकनंदा अशोक ने अपने व्याख्यान में कहा कि बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन अभी और अधिक जागरुकता की जरूरत है। मुख्य वक्ता एसएस राना और लूसी राना ने पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, औद्योगिकी डिजाइन आदि की जानकारी दी। जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल हरियाणा की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनीता त्रिपाठी ने बौद्धिक संपदा के औद्योगिकीकरण और उसका मौद्रिक लाभ लेने के प्रावधानों की जानकारी दी। यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने बताया कि महिलाएं समाज के लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिए लगातार कार्य करती हैं, लेकिन उनके कार्य को महत्व नहीं मिलता है। इस वजह से पेटेंट के क्षेत्र में महिलाओं की कम भागीदारी दिखती है। नवाचार की संस्कृति को शुरुआती अवस्था में छात्रों को स्कूलों में बतानी चाहिए। इस दौरान डॉ. अंजू रावत, अमित पोखरियाल आदि मौजूद रहे।
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विश्व बौद्धिक संपदा दिवस पर बृहस्पतिवार को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के विज्ञान धाम परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि महिला प्रौद्योगिकी संस्थान की निदेशक डॉ. अलकनंदा अशोक ने अपने व्याख्यान में कहा कि बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन अभी और अधिक जागरुकता की जरूरत है। मुख्य वक्ता एसएस राना और लूसी राना ने पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, औद्योगिकी डिजाइन आदि की जानकारी दी। जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल हरियाणा की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनीता त्रिपाठी ने बौद्धिक संपदा के औद्योगिकीकरण और उसका मौद्रिक लाभ लेने के प्रावधानों की जानकारी दी। यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने बताया कि महिलाएं समाज के लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिए लगातार कार्य करती हैं, लेकिन उनके कार्य को महत्व नहीं मिलता है। इस वजह से पेटेंट के क्षेत्र में महिलाओं की कम भागीदारी दिखती है। नवाचार की संस्कृति को शुरुआती अवस्था में छात्रों को स्कूलों में बतानी चाहिए। इस दौरान डॉ. अंजू रावत, अमित पोखरियाल आदि मौजूद रहे।
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