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दून अस्पताल में 39 लोगों ने किया रक्तदान
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
विश्व थैलीसीमिया दिवस के मौके पर बुधवार को दून अस्पताल ब्लड बैंक में 39 लोगों ने रक्तदान किया। यह खून थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के उपयोग में आएगा। शिविर का आयोजन उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की ओर से किया गया था। इसके अलावा शहर में कई जगह विश्व थैलीसीमिया दिवस पर कार्यक्रम आयोजित हुए।
उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की प्रांतीय अध्यक्ष कृष्णा रावत ने बताया कि दून अस्पताल में नर्सेज और नर्सिंग छात्राओं ने रक्तदान किया। इस दौरान रक्तदान करने वालों को फायदे और प्रदेश में थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों की अवस्था की जानकारी दी गई। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, ब्लड बैंक के विभागाध्यक्ष, एसोसिएशन की प्रांतीय महामंत्री केंदा संसार, एएनएस कृष्णा बिष्ट, आभा कौशिक, सुभाषिनी, पुष्पा, सरिता रावत, नीलम सिंह, भावना, विद्या चौबे आदि मौजूद रहे।
हिमालयन सोसायटी ऑफ थैलीसीमिया, गैप फाउंडेशन और उत्तराखंड विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) की ओर से डब्ल्यूआईसी परिसर में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस मौके पर थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों ने कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में कोरोनेशन अस्पताल की डॉ. कविता जुनेजा, यूसर्क के डॉ. दुर्गेश पंत और शिखा फाउंडेशन की शिखा घिल्डियाल ने थैलीसीमिया की जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि यह एक अनुवांशिक बीमारी है। इसमें रक्त कोशिकाएं हीमोग्लोबीन विहीन होती हैं। इनमें रक्त संचरण के पहले ही ये टूट जाती हैं। हड्डियों के विकार, जिगर व तिल्ली की बीमारी से ग्रसित होने से बच्चों का भी विकास रुक जाता है। शीघ्र इलाज न मिलने से ज्यादातर बच्चों की मृत्यु दो से पांच वर्ष के भीतर ही हो जाती है। कार्यक्रम में अंशुमान रावत, प्रीति जैन, अशोक सिंह, बीएस राणा, पुनीत कौरा, आदि उपस्थित रहे।
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विश्व थैलीसीमिया दिवस के मौके पर बुधवार को दून अस्पताल ब्लड बैंक में 39 लोगों ने रक्तदान किया। यह खून थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के उपयोग में आएगा। शिविर का आयोजन उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की ओर से किया गया था। इसके अलावा शहर में कई जगह विश्व थैलीसीमिया दिवस पर कार्यक्रम आयोजित हुए।
उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की प्रांतीय अध्यक्ष कृष्णा रावत ने बताया कि दून अस्पताल में नर्सेज और नर्सिंग छात्राओं ने रक्तदान किया। इस दौरान रक्तदान करने वालों को फायदे और प्रदेश में थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों की अवस्था की जानकारी दी गई। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, ब्लड बैंक के विभागाध्यक्ष, एसोसिएशन की प्रांतीय महामंत्री केंदा संसार, एएनएस कृष्णा बिष्ट, आभा कौशिक, सुभाषिनी, पुष्पा, सरिता रावत, नीलम सिंह, भावना, विद्या चौबे आदि मौजूद रहे।
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हिमालयन सोसायटी ऑफ थैलीसीमिया, गैप फाउंडेशन और उत्तराखंड विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) की ओर से डब्ल्यूआईसी परिसर में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस मौके पर थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों ने कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में कोरोनेशन अस्पताल की डॉ. कविता जुनेजा, यूसर्क के डॉ. दुर्गेश पंत और शिखा फाउंडेशन की शिखा घिल्डियाल ने थैलीसीमिया की जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि यह एक अनुवांशिक बीमारी है। इसमें रक्त कोशिकाएं हीमोग्लोबीन विहीन होती हैं। इनमें रक्त संचरण के पहले ही ये टूट जाती हैं। हड्डियों के विकार, जिगर व तिल्ली की बीमारी से ग्रसित होने से बच्चों का भी विकास रुक जाता है। शीघ्र इलाज न मिलने से ज्यादातर बच्चों की मृत्यु दो से पांच वर्ष के भीतर ही हो जाती है। कार्यक्रम में अंशुमान रावत, प्रीति जैन, अशोक सिंह, बीएस राणा, पुनीत कौरा, आदि उपस्थित रहे।
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