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अंग दान महादान: 27 साल के बेटे को पिता ने दिया नया जीवन, एम्स ऋषिकेश में पहली बार हुआ किडनी ट्रांसप्लांट
Tue, 09 May 2023 10:33 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, ऋषिकेश
अमर उजाला नेटवर्क, ऋषिकेश
Published by: अनुज कुमार
Updated Tue, 09 May 2023 10:33 PM IST
सार
एम्स ऋषिकेश में पहली बार एक 27 साल के लड़के को उसके पिता की किडनी ट्रांसप्लांट की गई। उत्तराखंड का पहला सरकारी अस्पताल है, जहां यह सुविधा शुरू हुई है।
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aiims rishikesh
- फोटो : amar ujala
विस्तार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश (एम्स) में 27 वर्षीय युवक की किडनी प्रत्यारोपित कर उसे नया जीवन दिया गया है। युवक को उसके पिता की किडनी लगाई गई है। इसी के साथ एम्स ऋषिकेश उत्तराखंड का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है। जहां किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू हुई है।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि नैनीताल की रहने वाला युवक किडनी फेलियर की समस्या से ग्रसित थी। किडनी प्रत्यारोपण ही अंतिम विकल्प था। हालांकि यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। जिसे संस्थान की यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और ऐनेस्थेसिया विभाग की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया। इस प्रक्रिया में एम्स दिल्ली के चिकित्सकों का भी सहयोग रहा।
19 अप्रैल से डॉक्टरों की निगरानी में था युवक
यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर मित्तल ने बताया कि युवक का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकारी खर्च पर किया गया है। 3 घंटे तक चली प्रक्रिया के बाद 27 साल के युवक को उसके पिता की किडनी लगाई गई। जिसके बाद युवक को 19 अप्रैल से लगातार निगरानी में रखा गया था और अब वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। युवक पूरी तरह स्वस्थ है। उसे शीघ्र ही अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
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डॉक्टरों की इस टीम ने किया किडनी प्रत्यारोपण
टीम में एम्स यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अंकुर मित्तल, डॉ. विकास पंवार, डॉ. पीयूष गुप्ता, नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ.गौरव शेखर, डॉ. शेरोन कंडारी, डॉ. संदीप सैनी, ऐनेस्थेसिया विभाग के डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. वाईएस पयाल, डॉ. प्रवीन तलवार शामिल थे।
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संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि नैनीताल की रहने वाला युवक किडनी फेलियर की समस्या से ग्रसित थी। किडनी प्रत्यारोपण ही अंतिम विकल्प था। हालांकि यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। जिसे संस्थान की यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और ऐनेस्थेसिया विभाग की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया। इस प्रक्रिया में एम्स दिल्ली के चिकित्सकों का भी सहयोग रहा।
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19 अप्रैल से डॉक्टरों की निगरानी में था युवक
यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर मित्तल ने बताया कि युवक का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकारी खर्च पर किया गया है। 3 घंटे तक चली प्रक्रिया के बाद 27 साल के युवक को उसके पिता की किडनी लगाई गई। जिसके बाद युवक को 19 अप्रैल से लगातार निगरानी में रखा गया था और अब वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। युवक पूरी तरह स्वस्थ है। उसे शीघ्र ही अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
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डॉक्टरों की इस टीम ने किया किडनी प्रत्यारोपण
टीम में एम्स यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अंकुर मित्तल, डॉ. विकास पंवार, डॉ. पीयूष गुप्ता, नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ.गौरव शेखर, डॉ. शेरोन कंडारी, डॉ. संदीप सैनी, ऐनेस्थेसिया विभाग के डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. वाईएस पयाल, डॉ. प्रवीन तलवार शामिल थे।