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पौधों की राह देखते-देखते भर गए गड्ढे
Updated Sun, 15 Jul 2018 02:16 AM IST
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पौधों की राह देखते-देखते भर गए गड्ढे
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। रिस्पना नदी पुनर्जीवन अभियान के तहत 22 जुलाई को जब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत 2.5 लाख पौधे रोपने निकलेंगे तो पौधरोपण के लिए वहां ढाई महीने पहले खोदे गए गड्ढों में शायद ही एक-दो पौध बोने लायक मिले। दून के पर्यावरण को इससे लाभ मिलेगा, इसलिए अमर उजाला इस अभियान की सफलता की कामना के साथ शुरू से सरकार के साथ है। बस इसी मंशा के तहत अमर उजाला टीम ने ढाई लाख गड्ढों की सेहत जानने के लिए शनिवार को कैरवान गांव से मोथरोवाला तक पूरे क्षेत्र का दौरा किया तो यह अशुभ स्थिति सामने आई। ऐसे में जलपुरुष राजेंद्र सिंह की हाल की एक प्रेस कांफ्रेंस में कही बात याद आ रही है कि कहीं रिस्पना पुनर्जीवन अभियान इवेंट बनकर न रह जाए।
रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए 19 मई को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कैरवान गांव में गड्ढा खोदकर अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद कई संस्थाओं के सहयोग से मोथरोवाला तक ढाई लाख गड्ढे खोदे गए थे। तब अभियान को लेकर सरकार के साथ ही कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने बड़े-बड़े दावे किए थे। इन सभी गड्ढों में विभिन्न किस्म के पौधे लगने थे लेकिन पौने दो महीने तक एक भी पौधा नहीं लग सका है। जिससे गत मंगलवार को हुई बारिश के बाद लगभग सभी गड्ढे भर गए हैं। ऐसे में ढाई लाख पौधों के लिए दोबारा गड्ढे खोदने पड़ेंगे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? अब अभियान चलाने के लिए 22 जुलाई की तिथि तय की गई है। क्या इस दौरान फिर से ढाई लाख गड्ढे खोदे जा सकेंगे ? इस अभियान के तहत ढाई लाख में से एक लाख पौधे वन विभाग और डेढ़ लाख पौधे उद्यान विभाग उपलब्ध कराने हैं। उद्यान विभाग की ओर से आम, अमरूद, लीची, आंवला, कटहल आदि पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए सरकार ने करोड़ का बजट भी रखा है लेकिन इस दिशा में कोई खास कार्य अब तक नहीं हो सका है।
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‘आर यू अप फॉर इट’ कैंपेन भी नहीं पकड़ रहा रफ्तार
देहरादून। ‘आर यू अप फॉर इट’ कैंपेन के जरिये लोगों को मिशन रिस्पना से जोड़ने की मुहिम करीब महीने बाद भी रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। केवल 348 लोगों ने ही मिशन रिस्पना : रिस्पना टू ऋषिपर्णा फेसबुक पेज को लाइक किया है। कैंपेन के जरिये वित्त मंत्री प्रकाश पंत, अनुकृति गुर्साइं आदि का वीडियो बनाया गया था लेकिन इसके बावजूद लोग पेज को लाइक करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके अलावा यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम के जरिये भी लोगों से अभियान में शामिल होने की अपील की जा रही है। लेकिन सोशल मीडिया के जरिये लोगों को अभियान से जोड़ने का मकसद अभी तक पूरा होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में 22 जुलाई को ढाई लाख पौधे लगाने में अधिकारियों के पसीने छूट सकते हैं।
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कोट :
बारिश के चलते कैरवान गांव और मोथरोवाला में गड्ढे भरने की सूचना मिली है। जल्द ही अभियान चलाकर गड्ढों को फिर से खोदा जाएगा। फेसबुक पेज पर लाइक भले ही कम हैं, लेकिन विजिटर काफी हैं।
- मनुज गोयल, सिटी मजिस्ट्रेट
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। रिस्पना नदी पुनर्जीवन अभियान के तहत 22 जुलाई को जब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत 2.5 लाख पौधे रोपने निकलेंगे तो पौधरोपण के लिए वहां ढाई महीने पहले खोदे गए गड्ढों में शायद ही एक-दो पौध बोने लायक मिले। दून के पर्यावरण को इससे लाभ मिलेगा, इसलिए अमर उजाला इस अभियान की सफलता की कामना के साथ शुरू से सरकार के साथ है। बस इसी मंशा के तहत अमर उजाला टीम ने ढाई लाख गड्ढों की सेहत जानने के लिए शनिवार को कैरवान गांव से मोथरोवाला तक पूरे क्षेत्र का दौरा किया तो यह अशुभ स्थिति सामने आई। ऐसे में जलपुरुष राजेंद्र सिंह की हाल की एक प्रेस कांफ्रेंस में कही बात याद आ रही है कि कहीं रिस्पना पुनर्जीवन अभियान इवेंट बनकर न रह जाए।
रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए 19 मई को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कैरवान गांव में गड्ढा खोदकर अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद कई संस्थाओं के सहयोग से मोथरोवाला तक ढाई लाख गड्ढे खोदे गए थे। तब अभियान को लेकर सरकार के साथ ही कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने बड़े-बड़े दावे किए थे। इन सभी गड्ढों में विभिन्न किस्म के पौधे लगने थे लेकिन पौने दो महीने तक एक भी पौधा नहीं लग सका है। जिससे गत मंगलवार को हुई बारिश के बाद लगभग सभी गड्ढे भर गए हैं। ऐसे में ढाई लाख पौधों के लिए दोबारा गड्ढे खोदने पड़ेंगे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? अब अभियान चलाने के लिए 22 जुलाई की तिथि तय की गई है। क्या इस दौरान फिर से ढाई लाख गड्ढे खोदे जा सकेंगे ? इस अभियान के तहत ढाई लाख में से एक लाख पौधे वन विभाग और डेढ़ लाख पौधे उद्यान विभाग उपलब्ध कराने हैं। उद्यान विभाग की ओर से आम, अमरूद, लीची, आंवला, कटहल आदि पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए सरकार ने करोड़ का बजट भी रखा है लेकिन इस दिशा में कोई खास कार्य अब तक नहीं हो सका है।
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‘आर यू अप फॉर इट’ कैंपेन भी नहीं पकड़ रहा रफ्तार
देहरादून। ‘आर यू अप फॉर इट’ कैंपेन के जरिये लोगों को मिशन रिस्पना से जोड़ने की मुहिम करीब महीने बाद भी रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। केवल 348 लोगों ने ही मिशन रिस्पना : रिस्पना टू ऋषिपर्णा फेसबुक पेज को लाइक किया है। कैंपेन के जरिये वित्त मंत्री प्रकाश पंत, अनुकृति गुर्साइं आदि का वीडियो बनाया गया था लेकिन इसके बावजूद लोग पेज को लाइक करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके अलावा यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम के जरिये भी लोगों से अभियान में शामिल होने की अपील की जा रही है। लेकिन सोशल मीडिया के जरिये लोगों को अभियान से जोड़ने का मकसद अभी तक पूरा होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में 22 जुलाई को ढाई लाख पौधे लगाने में अधिकारियों के पसीने छूट सकते हैं।
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कोट :
बारिश के चलते कैरवान गांव और मोथरोवाला में गड्ढे भरने की सूचना मिली है। जल्द ही अभियान चलाकर गड्ढों को फिर से खोदा जाएगा। फेसबुक पेज पर लाइक भले ही कम हैं, लेकिन विजिटर काफी हैं।
- मनुज गोयल, सिटी मजिस्ट्रेट