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निगम की कमाई का जरिया बनेगा ई-कचरा

Wed, 11 Apr 2018 02:32 AM IST
Updated Wed, 11 Apr 2018 02:32 AM IST
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निगम की कमाई का जरिया बनेगा ई-कचरा
सुनीत द्विवेदी / अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी में परेशानी का सबब बना ई-कचरा अब नगर निगम की कमाई का जरिया बनेगा। निगम प्रबंधन ई-कचरे का निस्तारण कर इसको विभिन्न कंपनियों से रिसाइकिल करा पार्ट्स बनवाएगा। शहर से कितना ई-कचरा निकलता है, इसके लिए जल्द सर्वे होगा और योजना के लिए कार्ययोजना बनाए जाने को लेकर इसी सप्ताह निगम में विभिन्न एनजीओ और कंपनियों की बैठक होगी।
आमतौर पर लोग मोबाइल, टीवी, एसी, कंप्यूटर आदि का सामान खराब होने पर उसे कबाड़ में बेच देते हैं या सामान्य कूड़े के साथ फेंक देते हैं। जबकि उसमें तार या कई अन्य चीजें ठीक होती हैं। जिन्हें कंपनियां ले लेती हैं। निगम भी इस कचरे का निस्तारण करेगा। हालांकि, अभी घरों और प्रतिष्ठानों से रोजाना निकलने वाले ई-कचरे का अनुमान लगाने को सर्वे कराया जाएगा।
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नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे के मुताबिक दिल्ली, बंगलुरु जैसे बड़े शहरों की तर्ज पर जल्द दून में ई-कचरा अलग से उठाने की व्यवस्था की जाएगी। ताकि भविष्य में ई-कचरा से वातावरण दूषित न हो, इसे लेकर निगम की ओर से इसी सप्ताह बैठक आयोजित की जाएगी। कचरे को रिसाइकिल कर पार्ट्स बनाने के लिए भी विभिन्न कंपनियों से बात की जाएगी।
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ई-कचरे के लिए अलग से होगा डस्टबिन
नगर निगम की ओर से सूखा और गीला कूड़ा की अलग-अलग व्यवस्था के साथ ही ई-कचरे का कलेक्शन अलग डस्टबिन से करेगा। ऐसा होने से निगम के साथ ही लोगों को भी राहत मिलेगी। आमतौर पर कूड़ा एक साथ फेंकने के चलते ई-कचरा भी उसमें चला जाता है। जिससे उसकी रिसाइकिलिंग में दिक्कत आती है।

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क्या है ई-कचरा
बाजार में लगातार नए इलेक्ट्रानिक्स सामान आ रहे हैं। जिसके चलते लोग पुराने इलेक्ट्रानिक उपकरणों को कबाड़ में बेच देते हैं या उन्हें फेंक देते हैं। पुराने कंप्यूटर, माउस, की-बोर्ड, टीवी आदि ई-वेस्ट की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा कबाड़ बने चुके मोबाइल फोन, लैपटॉप फैक्स मशीन, फोटो कॉपी मशीन आदि में लेड, मरक्युरी, केडमियम जैसे घातक तत्व होते हैं। जिससे किडनी और फेफड़े को नुकसान पहुंचता है। साथ ही तमाम तरह बीमारी होने की भी आशंका रहती है।
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