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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   2009 Balwa Case: Bjp ANd Congress 25 leader Gets Big relief from Court

2009 बलवा प्रकरण: भाजपा-कांग्रेस के 25 नेताओं को राहत, कोर्ट ने सुनाया ये फैसला

Fri, 04 Oct 2019 08:26 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 04 Oct 2019 08:26 AM IST
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2009 Balwa Case: Bjp ANd Congress 25 leader Gets Big relief from Court
- फोटो : फाइल फोटो

साल 2009 में उत्तराखंड विधानसभा घेराव के दौरान बलवा और पुलिस से झड़प के मामले में मंत्री हरक सिंह रावत समेत 25 नेताओं के लिए राहत भरी खबर है। कांग्रेस नेता संग्राम सिंह पुंडीर की निगरानी याचिका के माध्यम से न्यायालय ने इस मुकदमे को वापस लेने की सरकार की मांग को उचित ठहराया है।

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मामले में एडीजे चतुर्थ शंकर राज की अदालत ने सीजेएम कोर्ट के आदेशों को निरस्त कर दिया है। अब सीजेएम कोर्ट 16 अक्तूबर को इस पर सुनवाई करेगा। गौरतलब है कि सबसे पहले वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने इस मुकदमे को वापस लेने का प्रार्थनापत्र सीजेएम न्यायालय ने प्रस्तुत किया था।
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सरकार का तर्क था कि यह ये नेता जनहित में प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन, सीजेएम कोर्ट ने इस मांग को अनुचित ठहराते हुए खारिज कर दिया था। सीजेएम कोर्ट में इस मुकदमे की कार्यवाही चलती रही।

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दोबारा मुकदमा वापस लेने को प्रार्थनापत्र दिया

इस बीच पिछले साल मई में सरकार ने दोबारा मुकदमा वापस लेने को प्रार्थनापत्र दिया। सीजेएम कोर्ट ने इसे भी एक सितंबर 2018 को खारिज कर दिया। लिहाजा, मुकदमे में आरोपी कई नेताओं की ओर से सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका प्रस्तुत की गई।

अब न्यायालय ने संग्राम सिंह पुंडीर बनाम उत्तराखंड सरकार वाली निगरानी याचिका को स्वीकार कर लिया। एडीजे चतुर्थ की अदालत ने सीजेएम कोर्ट के एक सितंबर 2018 के आदेशों को निरस्त कर दिया और इस पर आदेश पारित करने के लिए पत्रावली सीजेएम कोर्ट को प्रेषित कर दी। न्यायालय ने मुकदमा वापसी के सरकार के फैसले को लोकहित में माना है।

इन आरोपों में चल रहा मुकदमा 
आईपीसी 147(बलवा करना), आईपीसी 149(विधि विरुद्ध जमाव), आईपीसी 332(लोकसेवक के साथ मारपीट), आईपीसी 353(सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाना), आईपीसी 336(दूसरों के जीवन को खतरा पहुंचाने का कार्य करना) और आईपीसी 504(गाली गलौच करना)।

ये हैं आरोपी 

केबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, किशोर उपाध्याय, विनोद रावत, शंकर चंद रमोला, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य (तत्कालीन कांग्रेस नेता), राज्यसभा सांसद प्रदीप टाम्टा, विधायक कुंवर प्रणव सिंह, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना, संग्राम सिंह पुंडीर, भूपेंद्र उर्फ बिल्लू, महेश शर्मा, विजय सिंह चौहान, मनीष नागपाल, विवेक खंडूरी, शिवेश बहुगुणा, टिंकल अरोड़ा, विकास चौधरी, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्ममचारी और राव असफाक। 

ये था मामला 

21 दिसंबर 2009 को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत ने समर्थकों के साथ विधानसभा के घेराव के लिए कूच किया था। पुलिस ने रिस्पना पुल पर बेरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोका था।

इस दौरान उनका पुलिसकर्मियों के साथ विवाद हो गया। आरोप है कि इन नेताओं ने पुलिस से धक्कामुक्की और मारपीट की थी। इसके बाद पुलिस ने हरक सिंह रावत समेत 25 नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

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