फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   फर्जी प्रमाणपत्र मामले में तहसीलदार को क्लीन चिट

फर्जी प्रमाणपत्र मामले में तहसीलदार को क्लीन चिट

Fri, 14 Sep 2018 02:08 AM IST
Updated Fri, 14 Sep 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
फर्जी प्रमाणपत्र मामले में तहसीलदार को क्लीन चिट
फर्जी प्रमाणपत्र मामले में तहसीलदार को क्लीन चिट
विज्ञापन

ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र बनाए जाने के मामले में एडीएम कोर्ट ने तहसीलदार को क्लीन चिट दे दी है। राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस मामले की जांच जिला प्रशासन को सौंपी थी। स्क्रूटनी के लिए बनी टीम ने एडीएम के नेतृत्व में इस मामले की जांच की और निर्णय दिया है कि प्रमाणपत्र जारी करने में कोई गलती नहीं हुई है, तहसीलदार ने सही तरीके काम किया।
नैनीताल हाईकोर्ट में इसी वर्ष चतर दत्त जोशी की ओर से दायर याचिका के बाद उत्तराखंड अनुसूचित जनजाति आयोग को मामला सौंपा गया था। याचिकाकर्ता की शिकायत थी कि देहरादून जनपद के चकराता, कालसी और त्यूनी में करीब दो हजार फर्जी प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए हैं। आरोप यह भी था कि गोरखा समुदाय के कई लोग अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर सरकारी नौकरी कर रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर आयोग ने अपने स्तर पर पड़ताल की और जांच जिला प्रशासन को सौंप दी।
विज्ञापन

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि गोरखा जाति के लोग भले ही जौनसार बावर क्षेत्र के निवासी हों लेकिन अनुसूचित जनजाति का भाग नहीं हो सकते हैं। यदि जौनसार बावर को अनुसूचित जनजाति क्षेत्र मानते हुए जौनसारी जनजाति समुदाय के अतिरिक्त किसी अन्य समुदाय को भी अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं तो यह संविधान में वर्णित नियमों का उल्लंघन है। इसी क्रम में आयोग ने प्रशासन को निर्देश जारी किया कि जनजाति के रूप में जारी किए गए प्रमाणपत्रों की स्क्रूटनी कर समुचित कार्रवाई करें।
विज्ञापन
विज्ञापन


एडीएम का आदेश
इसी क्रम में एडीएम प्रशासन अरविंद कुमार पांडेय के नेतृत्व में मामले की छानबीन की गई। ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि तहसीलदार त्यूनी ने बचन सिंह पुत्र मेजर को अनुसूचित जनजाति (जौनसारी) का प्रमाणपत्र जारी किया है। वह सही और वास्तविक तथ्यों के आधार पर जारी किया है। आदेश मेें कहा गया है कि प्रमाणपत्र जिल्द बंदोबस्त 1949-50 के आधार पर जारी किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed