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सस्ती किताबों के साथ महंगी फीस पड़ रही भारी

Mon, 09 Apr 2018 01:40 AM IST
Updated Mon, 09 Apr 2018 01:40 AM IST
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सस्ती किताबों के साथ महंगी फीस पड़ रही भारी
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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स्कूलों में बच्चे को पढ़ाने के लिए सस्ती किताबें खरीदने वाले अभिभावक महंगी और मनमानी फीस पर खफा हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि अब सरकार शुल्क के लिए भी गाइडलाइन तय करे, ताकि ताकि मध्य वर्ग के अभिभावकों पर ज्यादा भार न पड़े। रविवार को अभिभावक पुस्तक विक्रेताओं की दुकान पर कतार लगाकर पर खड़े थे। इनमें से कई अभिभावक सस्ती किताबें खरीदकर खुश तो थे, लेकिन निजी स्कूलों की फीस पर मनमानी को लेकर परेशान भी दिखे। उनका कहना था कि शहर के कई स्कूलों ने इस बार भी नियम विरुद्ध शुल्क बढ़ोतरी कर दी है। निजी स्कूल वार्षिक फीस के अलावा अलग-अलग क्रियाकलाप, प्रोग्राम, फेस्ट, स्कूल मैगजीन के नाम पर कई गुना शुल्क वसूल रहे हैं, जो गलत है...

अभिभावकों की राय
सरकार के एनसीईआरटी किताब लागू करने के निर्णय से निजी स्कूलों की कुछ मनमानी तो खत्म र्हुई, लेकिन अभी फीस बढ़ोतरी भी बड़ी समस्या है। स्कूल अपनी मनमर्जी से शुल्क में बढ़ोतरी करते आ रहे हैं। इस साल भी कर दी गई है।
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-सुनीता रावत, अभिभावक
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हर महीने स्कूलों में कुछ न कुछ होता रहता है, जिसका पूरा खर्च हमसे वसूला जाता है। चाहे फेस्ट हो या कोई प्रोग्राम इस सभी खर्चे को ध्यान में रखते हुए सरकार को निजी निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण करना होगा।
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-ऊषा रावत, अभिभावक
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निजी स्कूलों की हर साल होने वाली शुल्क वृद्धि बेहद बड़ी समस्या है। सरकार लंबे समय से प्रयासरत जरूर है, लेकिन आज तक इस मनमानी को रोकने को कोई कानून नहीं बन पाया है। सरकार को जल्द से जल्द इसका एक्ट पास करना चाहिए।
-मदन शर्मा, अभिभावक
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स्कूलों को सरकार ने एनसीईआरटी किताबों को लेकर निश्चित तौर पर नियंत्रण में कर लिया है, लेकिन अब सरकार से हमारी मांग है कि शुल्क बढ़ोतरी पर भी कोई ठोस फैसला लिया जाए।

-सरोज भंडारी, अभिभावक
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फीस बढ़ोतरी के आरोप पर प्रदर्शन
दिल्ली पब्लिक स्कूल के अभिभावकों ने कॉशन मनी और वार्षिक शुल्क वसूलने के विरोध में रविवार को गांधी पार्क के सामने प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि स्कूल उनसे पांच हजार रुपये कॉशन मनी और सात हजार रुपये वार्षिक शुल्क वसूल रहा है। वह इसकी शिकायत मुख्य शिक्षा अधिकारी को भी कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। शुल्क जमा कराने की अंतिम तिथि दस अप्रैल है। ऐसे में वह शुल्क कैसे जमा कराएंगे। वहीं, डीपीएस के प्रिंसिपल बीके सिंह का कहना है कि पुराने छात्रों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। नए एडमिशन पर कॉशन मनी का प्रावधान है। वार्षिक शुल्क में परीक्षा शुल्क, मेडिकल शुल्क सहित कई मदों के शुल्क शामिल हैं। फिर भी अगर किसी अभिभावक को शिकायत है तो वह सीधे उनसे संपर्क कर सकता है।
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