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कुरान की जियारत से ईमान में होती है इजाफा

Mon, 28 May 2018 01:44 AM IST
Updated Mon, 28 May 2018 01:44 AM IST
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कुरान की जियारत से ईमान में होती है इजाफा
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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तस्मिया अकादमी की ओर से टर्नर रोड स्थित तस्मिया कुरान संग्रहालय में शनिवार को दो दिवसीय 14वीं ‘कुरान लेख कला के दर्पण में’ प्रदर्शनी का रविवार को समापन हो गया। इस दौरान हर वर्ग के हजारों लोग संग्रहालय में मौजूद दुनियाभर के कुरान पाक देखने के लिए पहुंचे।
दूसरे दिन प्रदर्शनी का शुभारंभ पूर्व मंत्री राम कुमार वालिया, आरटीआई समिति के अध्यक्ष मैथानी और रमेश भाटिया ने किया। इस दौरान छोटी बच्चियों ने नात-ए-पाक पढ़ी। इसके बाद शहर के विभिन्न इलाकों से हर वर्ग के लोग प्रदर्शनी में दुनियाभर के कुरान देखने पहुंचे। कई तरह के लेख, धातू कपड़े, खाल, मोती, प्लास्टिक, शीशे और चावल आदि पर लिखे कुरान लोगों के आकर्षण का केंद्र थे।
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शाम चार बजे समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदर्शनी को देखकर बड़ा सुकून मिला। ईश्वर एक है उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए वह सब के लिए है। कोई भी धर्म दूसरे धर्म के प्रति नफरत नहीं सिखाता और सब इंसानियत को मानते हैं जो कि सुख व प्रगति दोनो देता है। शहर मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने कहा कि कुरान को पढ़ने, सुनने और जियारत करने से ईमान में इजाफा होता है। अल्लाह की किताब की खिदमत करने पर अल्लाह बंदे को इनामात से नवाजता है।
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आयोजक डा. एस फारूख ने कहा कि यह विरासत हमारे पुरखों की है और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने समय समय पर इस में बढ़ोत्तरी की है। इस दौरान ब्रिगेडियर रमेश भाटिया, राज बख्शी, हर्ष वर्धन आर्य, डा. आदित्य आर्य, आम आदमी पार्टी की नेत्री उमा सिसौदिया, सरफराज अहमद, मुफ्ती वसीउल्लाह, सैय्यद मोहम्मद यासर, सैय्यद फरुख अहमद शहजादे, सैय्यद हारुन अहमद, जहांगीर अहमद, हाफिज शाहनजर आदि मौजूद थे।

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ताबीज बनवाने को उमड़े लोग
दोनों हाथ न होने के बाद भी नायाब तरीके से कुरआन की आयतें, दुआएं लिखने में माहिर मुफ्ती शान ए आलम से ताबीज बनवाने, कुरआन की आयतें और दुआएं लिखवाने के लिए पूरे दिन उनके पास महिलाओं और बच्चों की भीड़ जुटी रही। रोजा होने के बाद भी उन्होंने लोगों को निराश नहीं किया। पूरे दिन में सैकड़ां लोगों को ताबीज बनाकर दिए। तस्मिया अकादमी के मुफ्ती वसीउल्लाह ने बताया कि वे मूल रुप से अमरोहा के रहने वाले है। बचपन में एक हादसे में उन्होंने दोनों हाथ गंवा दिए थे। उन्होंने दारुल उलूम से मुफ्ती की तालीम हासिल की। अब वे तस्मिया अकादमी में ही अपनी सेवाएं दे रहे है।
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