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शिक्षा आत्मसम्मान का सबसे बड़ा द्वार
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ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। शिक्षा किसी भी व्यक्ति के लिए आत्मसम्मान का सबसे बड़ा द्वार है। यह अंधेरे से उजाले की ओर जाने की चाबी है। देश में महिला शिक्षा को लेकर अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। महिला शिक्षा को लेकर यदि सामाजिक सोच बदलेगी तो कई विषय अपने आप ही बदल जाएंगे। उक्त बातें वरिष्ठ साहित्यकार, लेखिका एवं पद्मश्री डॉ. मृणाल पांडे ने दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही। इस अवसर पर उन्होंने ‘ए बीकन ऑफ लाइट- महादेवी भटनागर एंड हर लेगेसी-महादेवी कन्या पाठशाला’ पुस्तक का विमोचन किया।
अपने संबोधन में डॉ. मृणाल पांडे ने कहा कि महिला शिक्षा को लेकर देश और समाज में कई वर्जनाएं तेजी से टूट रही हैं। यह बहुत अच्छी बात है। सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र मेें बढ़ी है। शिक्षा को सिर्फ स्कूली पढ़ाई के नजरिए से नहीं बल्कि और अधिक विस्तृत नजरिए से देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय महादेवी भटनागर ने वर्ष 1902 में महादेवी कन्या पाठशाला की स्थापना कर महिला शिक्षा को लेकर जो पहल की उसकी जितनी भी सराहना की जाए कम है। कार्यक्रम में ‘ए बीकन ऑफ लाइट-महादेवी भटनागर एंड हर लेगेसी-महादेवी कन्या पाठशाला’ पुस्तक के लेखक डॉ. मनोज पंजानी और जितेंद्र भटनागर को उन्होंने सम्मानित किया। इस अवसर पर दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के निदेशक डॉ. बीके जोशी, कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ. इंदू सिंह, डॉ. एसएन भटनागर आदि मौजूद रहे।
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वर्ष-1907 में इंग्लैंड की महारानी ने किया था कॉलेज का दौरा
एमकेपी कॉलेज अपने आप में इतिहास समेटे हुए हैं। इस कॉलेज की कई छात्राओं ने न सिर्फ स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया, बल्कि कई ने साहित्य, सिनेमा के क्षेत्र में भी कॉलेज का नाम रोशन किया है। इतिहास पर नजर डालें तो इंग्लैंड की महारानी ने वर्ष 1907 में भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने भारत में महिला शिक्षा की स्थिति का जायजा लेना चाहा तो उन्हें एमकेपी कॉलेज का भ्रमण कराया गया था। इस कॉलेज की कई छात्राओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसी कॉलेज की छात्रा कामना चंद्रा, शशिप्रभा शास्त्री, कुसुम चतुर्वेदी, अर्चना पैन्यूली, विद्या सिंह, अल्पना मिश्रा, चैतन्य कुमारी और नसीम बानो ने जहां साहित्य एवं लेखन के क्षेत्र में परचम लहराया। वहीं हिमानी शिवपुरी, अमरदीप झा, ऋति उल्फत, निवेदिता उनियाल ने सिनेमा और रंगमंच के क्षेत्र में कॉलेज का नाम रोशन किया।
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छह छात्राओं के साथ जलाई महिला शिक्षा की अलख
‘ए बीकन ऑफ लाइट- महादेवी भटनागर एंड हर लेगेसी-महादेवी कन्या पाठशाला’ पुस्तक में इस बात का भी जिक्र है कि किन परिस्थितियों में कॉलेज की संस्थापिका स्वर्गीय महादेवी भटनागर और उनके पति स्वर्गीय ज्योति स्वरूप भटनागर ने वर्ष 1902 में अपने ही घर में छह छात्राओं के साथ महिला शिक्षा की अलख जगाने का काम किया था। वर्ष-2002 में संस्था के सौ साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने शिरकत कर छात्राओं को संबोधित किया था।