{"_id":"5aa97dfe4f1c1bae758b56ea","slug":"171521057278-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फूल देई, छम्मा देई, दैंणि द्वार, भर भकार....","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फूल देई, छम्मा देई, दैंणि द्वार, भर भकार....
Updated Thu, 15 Mar 2018 01:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
लोकपर्व फूलदेई बुधवार को राजधानी दून समेत आस-पास के क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया गया। सुबह ही छोटे-छोटे बच्चे फूलों की टोकरियां लेकर लोगों के घरों पर गए और देहरी पर फूल बिखेरकर फूलदेई के गीत गाए। पहाड़ों में वसंत के आगमन पर यह त्योहार मनाने की परंपरा है। नववर्ष के समय जब पेड़ों पर फूल खिले होते हैं और चारों तरफ हरियाली होती है, तब बच्चे लोगों के घरों में फूल डालकर सुख-समृद्धि की कामना करते हुए ‘फूल देई, छम्मा देई, दैंणि द्वार, भर भकार...’ (आपकी देहरी फूलों से भरी हो, सबकी रक्षा करे, सबके लिए सफल हो और आपके भंडार भरे रहें) समेत अन्य गीत गाते हैं। इसके बदले में गृहस्वामी बच्चों को चावल, गुड़ व अन्य उपहार देते हैं। बुधवार सुबह बच्चों ने राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, अलग-अलग मंत्रियों व अधिकारियों के आवासों में फूल डाले। वहीं, मोहल्लों में भी यह लोकपर्व धूमधाम से मनाया गया। शहर में कई अन्य आयोजन भी हुए।
......................
धाद ने स्कूली बच्चों संग मनाया फूलदेई
देहरादून। धाद संस्था ने बुधवार को राजपुर रोड स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में स्कूली बच्चों के साथ फूलदेई का त्योहार मनाया। मुख्य अतिथि पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि लोक जीवन से जुड़े यह पर्व हमारी पहचान और अस्मिता से जुड़े हुए हैं। इनका संरक्षण व संवर्द्धन करने की आवश्यकता है।
बुधवार को धाद ने 50 विद्यालयों के 1000 छात्रों के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. जयंत नवानी ने कहा कि पांरपरिक त्योहारों को प्रचारित-प्रसारित किया जाना चाहिए। चित्रांकन, कविता, कहानी प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। शैक्षिक एकांश की नीलम बिष्ट ने कहा कि संस्था शिक्षकों और छात्रों के बीच रचनात्मक क्रियाशीलता का माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। इसके तहत माह भर 1000 छात्र विभिन्न विद्यालयों में अपनी पसंद की विधाओं में खुद को अभिव्यक्त करेंगे। आयोजन का समापन 13 अप्रैल होगा।
विज्ञापन
सचिव तन्मय ममगाईं ने कहा कि फूलदेई प्रकृति के नयेपन का त्योहार है। इसलिए हम छात्रों की रचनात्मकता को त्योहार के माध्यम से नया आयाम देने का प्रयास कर रहे हैं। इस अवसर पर एसके त्यागी, जगमोहन मेहंदीरत्ता, मनीषा ममगाईं, मीनक्षी जुयाल, दमयंती रावत, खेमकरण क्षेत्री, पूनम भटनागर, सरस्वती मल्ल समेत अन्य मौजूद रहे।
...................
परिषद् ने धूमधाम से मनाया फूलदेई पर्व
देहरादून। कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद् ने बुधवार को फूलदेई का पर्व धूमधाम से मनाया। बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर फूलों का महत्व समझाया। बुधवार को जीएमएस रोड स्थित कूर्मांचल भवन में बच्चों ने रंग बिरंगे कपड़े पहनकर भगवान को फूल, चावल और गुड़ चढ़ाकर खुशियां मनाई। सोनाक्षी, तृप्ति, स्वास्तिका, नैना, अनन्या, सिया, आनंद, और दीपक ने सुंदर प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगोें का मन मोह लिया। कार्यक्रम में कमल रजवार, राजेश पांडे, संतोष जोशी, वीरेंद्र कांडपाल, कांता बिष्ट, प्रेमा पंवार समेत अन्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
लोकपर्व फूलदेई बुधवार को राजधानी दून समेत आस-पास के क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया गया। सुबह ही छोटे-छोटे बच्चे फूलों की टोकरियां लेकर लोगों के घरों पर गए और देहरी पर फूल बिखेरकर फूलदेई के गीत गाए। पहाड़ों में वसंत के आगमन पर यह त्योहार मनाने की परंपरा है। नववर्ष के समय जब पेड़ों पर फूल खिले होते हैं और चारों तरफ हरियाली होती है, तब बच्चे लोगों के घरों में फूल डालकर सुख-समृद्धि की कामना करते हुए ‘फूल देई, छम्मा देई, दैंणि द्वार, भर भकार...’ (आपकी देहरी फूलों से भरी हो, सबकी रक्षा करे, सबके लिए सफल हो और आपके भंडार भरे रहें) समेत अन्य गीत गाते हैं। इसके बदले में गृहस्वामी बच्चों को चावल, गुड़ व अन्य उपहार देते हैं। बुधवार सुबह बच्चों ने राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, अलग-अलग मंत्रियों व अधिकारियों के आवासों में फूल डाले। वहीं, मोहल्लों में भी यह लोकपर्व धूमधाम से मनाया गया। शहर में कई अन्य आयोजन भी हुए।
......................
धाद ने स्कूली बच्चों संग मनाया फूलदेई
देहरादून। धाद संस्था ने बुधवार को राजपुर रोड स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में स्कूली बच्चों के साथ फूलदेई का त्योहार मनाया। मुख्य अतिथि पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि लोक जीवन से जुड़े यह पर्व हमारी पहचान और अस्मिता से जुड़े हुए हैं। इनका संरक्षण व संवर्द्धन करने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
बुधवार को धाद ने 50 विद्यालयों के 1000 छात्रों के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. जयंत नवानी ने कहा कि पांरपरिक त्योहारों को प्रचारित-प्रसारित किया जाना चाहिए। चित्रांकन, कविता, कहानी प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। शैक्षिक एकांश की नीलम बिष्ट ने कहा कि संस्था शिक्षकों और छात्रों के बीच रचनात्मक क्रियाशीलता का माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। इसके तहत माह भर 1000 छात्र विभिन्न विद्यालयों में अपनी पसंद की विधाओं में खुद को अभिव्यक्त करेंगे। आयोजन का समापन 13 अप्रैल होगा।
विज्ञापन
सचिव तन्मय ममगाईं ने कहा कि फूलदेई प्रकृति के नयेपन का त्योहार है। इसलिए हम छात्रों की रचनात्मकता को त्योहार के माध्यम से नया आयाम देने का प्रयास कर रहे हैं। इस अवसर पर एसके त्यागी, जगमोहन मेहंदीरत्ता, मनीषा ममगाईं, मीनक्षी जुयाल, दमयंती रावत, खेमकरण क्षेत्री, पूनम भटनागर, सरस्वती मल्ल समेत अन्य मौजूद रहे।
...................
परिषद् ने धूमधाम से मनाया फूलदेई पर्व
देहरादून। कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद् ने बुधवार को फूलदेई का पर्व धूमधाम से मनाया। बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर फूलों का महत्व समझाया। बुधवार को जीएमएस रोड स्थित कूर्मांचल भवन में बच्चों ने रंग बिरंगे कपड़े पहनकर भगवान को फूल, चावल और गुड़ चढ़ाकर खुशियां मनाई। सोनाक्षी, तृप्ति, स्वास्तिका, नैना, अनन्या, सिया, आनंद, और दीपक ने सुंदर प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगोें का मन मोह लिया। कार्यक्रम में कमल रजवार, राजेश पांडे, संतोष जोशी, वीरेंद्र कांडपाल, कांता बिष्ट, प्रेमा पंवार समेत अन्य मौजूद रहे।