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रंग महोत्सव में बिखरी लोक संस्कृति की छटा
Updated Fri, 29 Dec 2017 02:01 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
यूनिवर्सल सांस्कृतिक शोध एवं नाट्य नृत्य अकादमी की ओर से आयोजित रंग महोत्सव में कलाकारों ने अपने प्रदेश की लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। तीन दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट ने किया।
बृहस्पतिवार को नगर निगम में शुरू हुए महोत्सव में पूणे, महाराष्ट्र की गौरी भौंसले ने शानदार गीतों की प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। अंकुर प्रीतमदास ने महिषासुर मर्दनी नृत्य नाटिका का मंचन किया। हास्य नाटक नहले पर दहला ने दर्शकों को जमकर गुदगुदाया। नाटक के जरिये दर्शाया गया कि बदलते दौर में व्यक्ति मोबाइल फोन, व्हाट्सएप आदि के चक्कर में किस तरह से पड़ता है और फिर इसमें फंसता चला जाता है। वहीं, महिलाओं की संवेदना पर आधारित नाटक प्रथा में दर्शाया कि महिलाओं को प्रसव पीड़ा के दौरान किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। महिलाओं को कैसे काली कोठरी में बंद कर दिया जाता है। समारोह में कला श्रृंगार अकादमी आंध्र प्रदेश की निदेशक जीवी नारायणा, आयोजक राखी राजपूत, बीएस नेगी, अशोक तोमर, अनूप बहुगुणा, बलिराम भट्ट, अनुज राजपूत आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन रेनू कुंडू ने किया।
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यूनिवर्सल सांस्कृतिक शोध एवं नाट्य नृत्य अकादमी की ओर से आयोजित रंग महोत्सव में कलाकारों ने अपने प्रदेश की लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। तीन दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट ने किया।
बृहस्पतिवार को नगर निगम में शुरू हुए महोत्सव में पूणे, महाराष्ट्र की गौरी भौंसले ने शानदार गीतों की प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। अंकुर प्रीतमदास ने महिषासुर मर्दनी नृत्य नाटिका का मंचन किया। हास्य नाटक नहले पर दहला ने दर्शकों को जमकर गुदगुदाया। नाटक के जरिये दर्शाया गया कि बदलते दौर में व्यक्ति मोबाइल फोन, व्हाट्सएप आदि के चक्कर में किस तरह से पड़ता है और फिर इसमें फंसता चला जाता है। वहीं, महिलाओं की संवेदना पर आधारित नाटक प्रथा में दर्शाया कि महिलाओं को प्रसव पीड़ा के दौरान किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। महिलाओं को कैसे काली कोठरी में बंद कर दिया जाता है। समारोह में कला श्रृंगार अकादमी आंध्र प्रदेश की निदेशक जीवी नारायणा, आयोजक राखी राजपूत, बीएस नेगी, अशोक तोमर, अनूप बहुगुणा, बलिराम भट्ट, अनुज राजपूत आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन रेनू कुंडू ने किया।
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