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नारायणपुरी में दिखता सबका साथ सबका विकास

Tue, 20 Jun 2017 10:23 PM IST
Updated Tue, 20 Jun 2017 10:23 PM IST
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नारायणपुरी में दिखता सबका साथ सबका विकास
उत्तरकाशी। सबका साथ, सबका विकास कैसा होता है, यह जानने के लिए यमुनोत्री तीर्थयात्रा मार्ग के अंतिम गांव नारायणपुरी (बीफ) में देखा जा सकता है। आपसी सहमति से खेतों की चकबंदी करके गांव के व्यावसायिक महत्व के जानकीचट्टी वाले हिस्से में 70 परिवार वाले इस गांव के सभी लोगों के लिए होटल और ढाबे के लिए जमीन उपलब्ध कर स्थायी आमदनी के साधन जुटाए गए। इसके बाद पंचायती वाहन पार्किंग से ग्राम पंचायत के लिए 4.25 लाख सालाना आय और हर परिवार के लिए यहां एक-एक दुकान की जगह देकर अतिरिक्त आय का जरिया बनाया गया। आज पहाड़ों से हो रहे पलायन के इस दौर में इस गांव के परिवारों ने गांव नहीं छोड़ा बल्कि आसपास के गांवों से करीब 30 परिवार यहां आकर बस गए हैं। इन परिवारों ने भी यहां जमीन खरीदकर अपना कारोबार जमा लिया है।
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नारायणपुरी (बीफ) गांव में आज जो कुछ देखने को मिल रहा है, वह क्षेत्र के विकास के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा जुनून वाले पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष स्व. राजेंद्र सिंह रावत की देन है। सत्तर के दशक में जब वह देहरादून से कानून की पढ़ाई कर रहे थे तो पढ़ाई के बाद उन्होंने गांव में डेरा जमाकर बिखरी खेती वाली जमीन के कारण असंभव माने जाने वाली और आपसी सहमति वाली चकबंदी का अनूठा मॉडल तैयार किया। नौगांव ब्लॉक के ब्लॉक प्रमुख के कार्यकाल में उन्होंने पंचायती पार्किंग स्थल तैयार करवाया। आज चकबंदी के कारण गांव के लोग जानकीचट्टी यात्रा पड़ाव में खुले होटल ढाबों के लिए सब्जियां तैयार कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। 15 वर्ष तक प्रधान रहे जगत सिंह तथा वर्तमान प्रधान चैन सिंह कहते हैं कि पार्किंग से होने वाली सालाना आय को वह गांव के गरीब परिवार की बेटी की शादी में मदद करने या किसी तरह के संकट से घिरे परिवार की मदद में खर्च करते हैं। गांव की सफाई तथा खेतों की रखवाली के लिए वर्षभर चौकीदार का वेतन भी इसी कमाई से देते हैं। नारायणपुरी गांव के स्व. राजेंद्र रावत के छोटे भाई केदार सिंह रावत वर्तमान यमुनोत्री से भाजपा के विधायक है। चकबंदी को लेकर उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश वाले जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 161 के अड़ंगे के कारण अभी तक सांटी (अदला-बदली ) गई जमीन का खसरा खतौनी में गांव वालों के नाम दर्ज नहीं हो पाई। उनकी अध्यक्षता में जनवरी-2016 में बनी चकबंदी सलाहकार समिति ने नौ माह की कड़ी मेहनत के बाद ड्राफ्ट तैयार कर 5 जुलाई को सदन में पास करा दिया। अब प्रदेश में नए चकबंदी कानून अस्तित्व में आने के बाद उम्मीद जगी है कि उनके गांव में अदला-बदली की गई जमीन लोगों के नाम दर्ज हो जाएगी।
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