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सभी केंद्र, अभी इंटरनेट पर नहीं-काम की बात- कक्षा से लेकर विवि तक सुनी

Sun, 12 May 2019 02:19 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 12 May 2019 02:19 AM IST
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सभी केंद्र, अभी इंटरनेट पर नहीं-काम की बात-    कक्षा से लेकर विवि तक सुनी
ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। 12वीं के बाद कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की समस्याएं अब कक्षा के स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक अलग-अलग सुनी जाएंगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसके लिए छात्रों की शिकायत विनिमय-2019 लागू कर दिया है। सभी विवि और कॉलेजों को इसी सत्र से इस पर अमल करने को कहा गया है। कॉलेजों को दाखिले शुरू करने से 60 दिन पहले अपनी पूरी फैकल्टी से लेकर फीस तक की जानकारी वेबसाइट पर देनी होगी।

इस तरह काम करेंगी चार समितियां
1. इंस्टीट्यूशन ग्रीवांस रेड्रेसल कमेटी (आईजीआरसी) : अगर शिकायत डिपार्टमेंट ग्रीवांस रेड्रेसल समिति से संबंधित नहीं है तो वह आईजीआरसी को भेजी जाएगी। इसमें डीन या संस्थान के वरिष्ठ विशेषज्ञ चेयरमैन होंगे। इसके अलावा इस समिति में डीएसडब्ल्यू, दो सीनियर शिक्षक और प्रोक्टर शामिल होंगे। छात्रों की समस्या पर यह 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी।
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2. डिपार्टमेंट ग्रीवांस रेड्रेसल कमेटी (डीजीआरसी) : किसी भी विभाग में विभागध्यक्ष इस समिति का दो साल के लिए अध्यक्ष होगा। समिति में दूसरे विभाग का एक प्रोफेसर और दो सदस्य प्रोफेसर होंगे। छात्र की समस्या का हल करने की रिपोर्ट 15 दिन के भीतर उस संस्थान के प्रिंसिपल को देनी होगी।
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3. कॉलेज ग्रीवांस रेड्रेसल कमेटी (सीजीआरसी) : छात्र अपनी समस्या सीजीआरसी को भी बता सकता है। इसमें कॉलेज के प्रिंसिपल चेयरमैन होंगे। वह दो शिक्षकों को इसमें सदस्य नामित करेंगे। छात्र की शिकायत पर होने वाली कार्रवाई की रिपोर्ट यह समिति 15 दिन के भीतर विश्वविद्यालय के कुलपति को सौंपेगी।
4. यूनिवर्सिटी ग्रीवांस रेड्रेसल कमेटी(यूजीआरसी) : सीजीआरसी अगर समस्या का हल नहीं कर पाती तो यह मामला यूजीआरसी के पास जाएगा। पांच सदस्यों की यह कमेटी प्रत्येक कॉलेज के लिए अलग-अलग बनाई जा सकती है। विवि चाहेगा तो कॉलेजों को ग्रुप में बांटकर भी समितियां बना सकता है। इन समितियों में विवि के वरिष्ठ प्रोफेसर को चेयरमैन बनाया जाएगा। इसके अलावा संबद्ध कॉलेजों के प्रिंसिपल भी इस समिति में शामिल होंगे।


कॉलेजों के लिए यह निर्देश
नए रेगुलेशन में कॉलेजों के लिए भी कई दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। दाखिले शुरू होने से कम से कम 60 दिन पहले सभी कॉलेजों को कोर्स, सीटों की संख्या, फीस, पात्रता नियम, रेगुलर फैकल्टी, विजिटिंग फैकल्टी और इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि की जानकारी अपनी वेबसाइट पर जारी करनी होगी।
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