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रेंजरों ने डीएफओ के खिलाफ खोला मोर्चा
Updated Wed, 25 Jul 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
प्रभागीय वन अधिकारी भूमि संरक्षण कालसी की ओर से तिमली रेंज की वन क्षेत्राधिकारी को रेंज से हटाकर कार्यालय संबद्ध करने के विरोध में वन क्षेत्राधिकारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ पदाधिकारियों ने आदेश को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त किए जाने की मांग की है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि डीएफओ को ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार ही नहीं है।
उल्लेखनीय है कि डीएफओ कालसी सुरेंद्र कुमार ने दो दिन पूर्व तिमली रेंज की रेंजर पूजा रावल को उनके पद से हटाकर कार्यालय संबद्ध कर दिया था। संघ पदाधिकारियों की बैठक अध्यक्ष राम सिंह बिष्ट और महामंत्री विजयपाल सिंह पटवाल की मौजूदगी में हुई। बैठक में डीएफओ के आदेश को कानूनों के विपरीत बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि वन क्षेत्राधिकारी राजपत्रित श्रेणी के अधिकारी हैं, जिसे हटाने के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति जरूरी है। लेकिन आला अफसरों से इस संबंध में कोई अनुमति ही नहीं ली गई। संघ पदाधिकारियों ने प्रमुख वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष से मांग की है कि उक्त आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के साथ ही सभी प्रभागीय वन अधिकारियोें को निर्देशित करें कि वे ऐसे आदेश्र पारित करने से पहले सक्षम अधिकारियों से अनुमोदन लेने के साथ ही कार्रवाई करें।
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प्रभागीय वन अधिकारी भूमि संरक्षण कालसी की ओर से तिमली रेंज की वन क्षेत्राधिकारी को रेंज से हटाकर कार्यालय संबद्ध करने के विरोध में वन क्षेत्राधिकारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ पदाधिकारियों ने आदेश को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त किए जाने की मांग की है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि डीएफओ को ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार ही नहीं है।
उल्लेखनीय है कि डीएफओ कालसी सुरेंद्र कुमार ने दो दिन पूर्व तिमली रेंज की रेंजर पूजा रावल को उनके पद से हटाकर कार्यालय संबद्ध कर दिया था। संघ पदाधिकारियों की बैठक अध्यक्ष राम सिंह बिष्ट और महामंत्री विजयपाल सिंह पटवाल की मौजूदगी में हुई। बैठक में डीएफओ के आदेश को कानूनों के विपरीत बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि वन क्षेत्राधिकारी राजपत्रित श्रेणी के अधिकारी हैं, जिसे हटाने के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति जरूरी है। लेकिन आला अफसरों से इस संबंध में कोई अनुमति ही नहीं ली गई। संघ पदाधिकारियों ने प्रमुख वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष से मांग की है कि उक्त आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के साथ ही सभी प्रभागीय वन अधिकारियोें को निर्देशित करें कि वे ऐसे आदेश्र पारित करने से पहले सक्षम अधिकारियों से अनुमोदन लेने के साथ ही कार्रवाई करें।
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