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जैविक खेती के साथ ही मछली और मुर्गी पालन कर रहे युवा
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
एक ओर जहां युवा खेतीबाड़ी से दूर होकर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं, पछवादून में आठ युवा स्वरोजगार से जुड़कर खेती के साथ ही मछली और मुर्गी पालन में जुटे हैं। ये युवा 50 बीघा भूमि पर समूह आधारित जैविक खेती कर पारंपरिक व नकदी फसलों के साथ औषधीय पादपों का उत्पादन कर अन्य युवाओं को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं।
पछवादून के अमित रोहिला, हिमांशु आर्य, प्रवेश सिंह, कविता चौहान, लीला, महेंद्र चौहान, भाव सिंह और राजेश कुमार ने ग्रेजुएशन के बाद खुद रोजगार के साधन विकसित करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने तीन साल पहले मल्टीपल एक्शन ग्रुप फॉर इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी के नाम से संगठन बनाया और ग्रामीण स्तर पर ही समूह आधारित खेती शुरू की। सोसाइटी के अध्यक्ष अमित रोहिला ने बताया कि छोटे स्तर पर नकदी फसलों के उत्पादन से मुनाफा मिलने के बाद दो वर्ष पूर्व ढकरानी में 50 बीघा बंजर भूमि को 10 साल के लिए किराये पर लिया। इस जमीन पर उन्होंने नकदी व पारंपरिक फसलों के साथ ही औषधीय पादपों का उत्पादन शुरू किया।
एक फसल चक्र में बासमती चावल व गन्ना उगाने के बाद इन दिनों जमीन पर लौकी, बैंगन, बथुआ, हरी मिर्च, शिमला मिर्च के साथ ही लैमनग्रास की फसल लहलहा रही है। साथ ही औषधीय पादपों में चाय, कोल्ड मिंट व पान मसाले में प्रयुक्त होने वाले मिंट, डिटरजेंट और इत्र बनाने में सहायक सिट्रोनेला, कैंसर, उच्च रक्तचाप व मधुमेह में प्रयुक्त की जाने वाली याकून, सर्पगंधा व तुलसी का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
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रोहिला ने बताया कि उनका संगठन क्षेत्र के युवाओं को खेती से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण शिविर भी लगा रहा है। ताकि युवाओं में खेती के प्रति जागरुकता लाई जा सके। साथ ही मछली पालन व मुर्गी पालन के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। बहरहाल, रोजगार की तलाश में गांवों से युवाओं के तेजी से हो रहे पलायन के बीच पछवादून के युवाओं का यह समूह अन्य युवाओं के लिए नजीर साबित हो रहा है।
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दिल्ली और देहरादून में बेची जा रही जैविक सब्जी
सोसाइटी से जुड़े युवा सब्जियों का उत्पादन कर दिल्ली और देहरादून के बाजारों में बेच रहे हैं। प्रवेश सिंह ने बताया कि पिछले एक माह में चार कुंतल लौकी देहरादून के बाजार में बेची जा चुकी है। साथ ही दिल्ली के जैविक बाजार में भी बड़े पैमाने पर सब्जी बेची जा रही है।
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एक ओर जहां युवा खेतीबाड़ी से दूर होकर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं, पछवादून में आठ युवा स्वरोजगार से जुड़कर खेती के साथ ही मछली और मुर्गी पालन में जुटे हैं। ये युवा 50 बीघा भूमि पर समूह आधारित जैविक खेती कर पारंपरिक व नकदी फसलों के साथ औषधीय पादपों का उत्पादन कर अन्य युवाओं को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं।
पछवादून के अमित रोहिला, हिमांशु आर्य, प्रवेश सिंह, कविता चौहान, लीला, महेंद्र चौहान, भाव सिंह और राजेश कुमार ने ग्रेजुएशन के बाद खुद रोजगार के साधन विकसित करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने तीन साल पहले मल्टीपल एक्शन ग्रुप फॉर इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी के नाम से संगठन बनाया और ग्रामीण स्तर पर ही समूह आधारित खेती शुरू की। सोसाइटी के अध्यक्ष अमित रोहिला ने बताया कि छोटे स्तर पर नकदी फसलों के उत्पादन से मुनाफा मिलने के बाद दो वर्ष पूर्व ढकरानी में 50 बीघा बंजर भूमि को 10 साल के लिए किराये पर लिया। इस जमीन पर उन्होंने नकदी व पारंपरिक फसलों के साथ ही औषधीय पादपों का उत्पादन शुरू किया।
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एक फसल चक्र में बासमती चावल व गन्ना उगाने के बाद इन दिनों जमीन पर लौकी, बैंगन, बथुआ, हरी मिर्च, शिमला मिर्च के साथ ही लैमनग्रास की फसल लहलहा रही है। साथ ही औषधीय पादपों में चाय, कोल्ड मिंट व पान मसाले में प्रयुक्त होने वाले मिंट, डिटरजेंट और इत्र बनाने में सहायक सिट्रोनेला, कैंसर, उच्च रक्तचाप व मधुमेह में प्रयुक्त की जाने वाली याकून, सर्पगंधा व तुलसी का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
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रोहिला ने बताया कि उनका संगठन क्षेत्र के युवाओं को खेती से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण शिविर भी लगा रहा है। ताकि युवाओं में खेती के प्रति जागरुकता लाई जा सके। साथ ही मछली पालन व मुर्गी पालन के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। बहरहाल, रोजगार की तलाश में गांवों से युवाओं के तेजी से हो रहे पलायन के बीच पछवादून के युवाओं का यह समूह अन्य युवाओं के लिए नजीर साबित हो रहा है।
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दिल्ली और देहरादून में बेची जा रही जैविक सब्जी
सोसाइटी से जुड़े युवा सब्जियों का उत्पादन कर दिल्ली और देहरादून के बाजारों में बेच रहे हैं। प्रवेश सिंह ने बताया कि पिछले एक माह में चार कुंतल लौकी देहरादून के बाजार में बेची जा चुकी है। साथ ही दिल्ली के जैविक बाजार में भी बड़े पैमाने पर सब्जी बेची जा रही है।