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बारिश नहीं होने से सूख रहीं फसलें
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
साहिया। क्षेत्र में बारिश नहीं होने से काश्तकारों की फसलें सूखने की कगार पर हैं। सबसे ज्यादा असर गागली, हरी मिर्च, शिमला मिर्च, आलू, अदरक, टमाटर, धनियां के साथ ही लोबिया, फ्रासबीन की फसलों पर पड़ रहा है, जिससे किसान मायूस हैं। किसानों ने प्रशासन से उचित आर्थिक सहायता मुहैया कराने की मांग की है।
जौनसार बावर में परंपरागत खेती के साथ ही नगदी फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। जबकि, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बागवानी भी की जाती है। सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण अधिकांश खेती बारिश पर ही निर्भर रहती है। इन दिनों परगने में नगदी फसलों की बुुआई बड़े पैमाने पर की गई है, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण अधिकांश फसलें सूखने की कगार पर हैं। फसलें सूखने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है।
किसान परम सिंह, दिनेश, अमर सिंह तोमर, टीकम सिंह, नारायण सिंह ने बताया कि जून का पहला पखवाड़ा समाप्त होने के बाद भी खेतों को एक बूंद पानी नहीं मिला है। ऐसे में फसलें सूखने लग गईं हैं। फसलों के सूखे की चपेट में आने से किसानों में मायूसी छाई हुई है।
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उधर, उद्यान विभाग के प्रभारी डॉ. रामकुमार ने बताया कि क्षेत्र में बारिश नहीं होने से 40 से 50 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान पहुंच चुका है, जिसकी जानकारी उच्चाधिकारियों केे माध्यम से प्रशासन को दी गई है।
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साहिया। क्षेत्र में बारिश नहीं होने से काश्तकारों की फसलें सूखने की कगार पर हैं। सबसे ज्यादा असर गागली, हरी मिर्च, शिमला मिर्च, आलू, अदरक, टमाटर, धनियां के साथ ही लोबिया, फ्रासबीन की फसलों पर पड़ रहा है, जिससे किसान मायूस हैं। किसानों ने प्रशासन से उचित आर्थिक सहायता मुहैया कराने की मांग की है।
जौनसार बावर में परंपरागत खेती के साथ ही नगदी फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। जबकि, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बागवानी भी की जाती है। सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण अधिकांश खेती बारिश पर ही निर्भर रहती है। इन दिनों परगने में नगदी फसलों की बुुआई बड़े पैमाने पर की गई है, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण अधिकांश फसलें सूखने की कगार पर हैं। फसलें सूखने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है।
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किसान परम सिंह, दिनेश, अमर सिंह तोमर, टीकम सिंह, नारायण सिंह ने बताया कि जून का पहला पखवाड़ा समाप्त होने के बाद भी खेतों को एक बूंद पानी नहीं मिला है। ऐसे में फसलें सूखने लग गईं हैं। फसलों के सूखे की चपेट में आने से किसानों में मायूसी छाई हुई है।
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उधर, उद्यान विभाग के प्रभारी डॉ. रामकुमार ने बताया कि क्षेत्र में बारिश नहीं होने से 40 से 50 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान पहुंच चुका है, जिसकी जानकारी उच्चाधिकारियों केे माध्यम से प्रशासन को दी गई है।