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प्रवासी मिलन समारोह में लोक संस्कृति की धूम
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ब्यूरो,अमर उजाला/विकासनगर
कालसी। जौनसार क्षेत्र के बिहार, डिंडाल, गास्की, बान्सू, लूहन और लोहारना में शनिवार और रविवार को प्रवासी मिलन समारोह धूमधाम से मनाया गया। कहीं पर ढोल धमाऊ की थाप पर जौनसारी लोक संस्कृति हारुल, झैंता, रासौ, तांदी गीत की धूम रही तो कहीं पर पंचायती आंगनों में पांडव नृत्य मंडावणैं की झलक देखने को मिली।
बिहार गांव और लोहारना में रविवार को काली माता के भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। बिहार गांव के 85 वर्षीय सुरजन सिंह और पूर्व प्रधान विक्रम सिंह तोमर ने कहा कि सबसे पहले प्रवासी मिलन समारोह का कार्यक्रम मुंशी गांव में हुआ। उसके बाद बिहार में, फिर डिंड़ाल, गास्की और अब पचास से भी अधिक गांव में इस प्रकार के कार्यक्रम किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम में सभी का मिलन होता है। आपसी भाईचारा और ताना बाना बनाए रखने के साथ ही सभी लोग गांव को विकसित करने पर चर्चा करने के साथ ही सहयोग भी देते हैं। बताया कि प्रवासी मिलन समारोह के दौरान सामूहिक भोज करने के साथ लोक गीत और लोक नृत्यों का सिलसिला भी चलता है।
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कालसी। जौनसार क्षेत्र के बिहार, डिंडाल, गास्की, बान्सू, लूहन और लोहारना में शनिवार और रविवार को प्रवासी मिलन समारोह धूमधाम से मनाया गया। कहीं पर ढोल धमाऊ की थाप पर जौनसारी लोक संस्कृति हारुल, झैंता, रासौ, तांदी गीत की धूम रही तो कहीं पर पंचायती आंगनों में पांडव नृत्य मंडावणैं की झलक देखने को मिली।
बिहार गांव और लोहारना में रविवार को काली माता के भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। बिहार गांव के 85 वर्षीय सुरजन सिंह और पूर्व प्रधान विक्रम सिंह तोमर ने कहा कि सबसे पहले प्रवासी मिलन समारोह का कार्यक्रम मुंशी गांव में हुआ। उसके बाद बिहार में, फिर डिंड़ाल, गास्की और अब पचास से भी अधिक गांव में इस प्रकार के कार्यक्रम किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम में सभी का मिलन होता है। आपसी भाईचारा और ताना बाना बनाए रखने के साथ ही सभी लोग गांव को विकसित करने पर चर्चा करने के साथ ही सहयोग भी देते हैं। बताया कि प्रवासी मिलन समारोह के दौरान सामूहिक भोज करने के साथ लोक गीत और लोक नृत्यों का सिलसिला भी चलता है।
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