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बंजर होने की कगार पर किसानों की जमीन
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
तहसील अंतर्गत दूरस्थ कंडी क्षेत्र के 20 गांवों में सिंचाई सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों की जमीन बंजर होने की कगार पर है। चार दशक पूर्व ग्रामीणों ने खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पास से होकर बहती सदानीरा कोट नदी से कच्ची गूल बनाई थी, जो प्रशासन की अनदेखी के कारण पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसके चलते 10 वर्षों से ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। ग्रामीण कई बार पक्की गूल के निर्माण की गुहार लगा चुके हैं।
मसूरी और भद्रराज की पहाड़ियों की तलहटी में बसे कंडी क्षेत्र के इन गांवों में करीब 10 हजार की आबादी रहती है। पहाड़ी क्षेत्र होने के साथ ही मसूरी और विकासनगर शहर के नजदीक होने के कारण यहां एक दशक पूर्व तक काफी चहल पहल रहती थी। ग्रामीण खेती बाड़ी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते थे, लेकिन सिंचाई सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को खेती से उनकी मेहनत के अनुरूप उत्पादन नहीं मिल रहा है। द्वारथा गांव के बुजुर्ग डॉ. तुमन सिंह, कोटी के भगत सिंह, गुलाब सिंह, रमेश, पूर्व प्रधान चंद्रकांता, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सुनीता देवी ने बताया कि 40 वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने श्रमदान कर कोट नदी से सिंचाई गूल का निर्माण किया था। कच्ची गूल होने के चलते हर बरसात में यह क्षतिग्रस्त हो जाती थी। बावजूद इसके ग्रामीण गूल की मरम्मत कर किसी तरह खेतों तक पानी पहुंचा रहे थे, लेकिन पिछले 10 वर्षों से गूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इससे खेतों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है।
स्थानीय जन प्रतिनिधियों से कई बार सिंचाई के लिए पक्की गूल का निर्माण करने की गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पहाड़ी सीढ़ीदार खेतों पर सिंचाई के अभाव में मेहनत के अनुरूप फसलों का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिससे ग्रामीण खेती बाड़ी छोड़कर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर रुख करने लगे हैं। ग्रामीणों ने क्षेत्र में कृषि के विकास के लिए सिंचाई सुविधा मुहैया कराने की मांग की है।
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पशुपालन भी हुआ प्रभावित
सिंचाई सुविधा के अभाव खेतों में अन्न उत्पादन के साथ ही पशुओं के लिए पर्याप्त घास और चारा भी पैदा नहीं हो रहा है। ग्रामीण बस्तियों के आसपास प्राकृतिक तालाब भी नहीं हैं। इसके चलते ग्रामीणों ने पशुपालन भी बंद कर दिया है। स्थानीय बुजुर्ग डॉ. तुमन सिंह ने बताया कि 10 वर्ष पूर्व तक ग्रामीण दुधारू पशुओं के साथ ही खेतों में हल लगाने के लिए बैल और भेड़ बकरियां पालते थे। दुधारू पशुओं का दूध व अन्य दुग्ध पदार्थ ग्रामीण विकासनगर सहित आसपास के शहरी कस्बों में बेचकर अपनी आर्थिकी बढ़ाते थे। साथ ही भेड़ बकरी पालन से गांवों ऊन से संबंधित कुटीर उद्योग चलते थे।
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कंडी क्षेत्र का विकास प्राथमिकता में शामिल है। क्षेत्र में सिंचाई गूल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शीघ्र ही बजट स्वीकृत कराकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। साथ ही क्षेत्र को भद्रराज और मसूरी से जोड़कर पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित किया जाएगा। -सहदेव पुंडीर, सहसपुर विधायक
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तहसील अंतर्गत दूरस्थ कंडी क्षेत्र के 20 गांवों में सिंचाई सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों की जमीन बंजर होने की कगार पर है। चार दशक पूर्व ग्रामीणों ने खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पास से होकर बहती सदानीरा कोट नदी से कच्ची गूल बनाई थी, जो प्रशासन की अनदेखी के कारण पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसके चलते 10 वर्षों से ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। ग्रामीण कई बार पक्की गूल के निर्माण की गुहार लगा चुके हैं।
मसूरी और भद्रराज की पहाड़ियों की तलहटी में बसे कंडी क्षेत्र के इन गांवों में करीब 10 हजार की आबादी रहती है। पहाड़ी क्षेत्र होने के साथ ही मसूरी और विकासनगर शहर के नजदीक होने के कारण यहां एक दशक पूर्व तक काफी चहल पहल रहती थी। ग्रामीण खेती बाड़ी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते थे, लेकिन सिंचाई सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को खेती से उनकी मेहनत के अनुरूप उत्पादन नहीं मिल रहा है। द्वारथा गांव के बुजुर्ग डॉ. तुमन सिंह, कोटी के भगत सिंह, गुलाब सिंह, रमेश, पूर्व प्रधान चंद्रकांता, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सुनीता देवी ने बताया कि 40 वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने श्रमदान कर कोट नदी से सिंचाई गूल का निर्माण किया था। कच्ची गूल होने के चलते हर बरसात में यह क्षतिग्रस्त हो जाती थी। बावजूद इसके ग्रामीण गूल की मरम्मत कर किसी तरह खेतों तक पानी पहुंचा रहे थे, लेकिन पिछले 10 वर्षों से गूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इससे खेतों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है।
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स्थानीय जन प्रतिनिधियों से कई बार सिंचाई के लिए पक्की गूल का निर्माण करने की गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पहाड़ी सीढ़ीदार खेतों पर सिंचाई के अभाव में मेहनत के अनुरूप फसलों का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिससे ग्रामीण खेती बाड़ी छोड़कर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर रुख करने लगे हैं। ग्रामीणों ने क्षेत्र में कृषि के विकास के लिए सिंचाई सुविधा मुहैया कराने की मांग की है।
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पशुपालन भी हुआ प्रभावित
सिंचाई सुविधा के अभाव खेतों में अन्न उत्पादन के साथ ही पशुओं के लिए पर्याप्त घास और चारा भी पैदा नहीं हो रहा है। ग्रामीण बस्तियों के आसपास प्राकृतिक तालाब भी नहीं हैं। इसके चलते ग्रामीणों ने पशुपालन भी बंद कर दिया है। स्थानीय बुजुर्ग डॉ. तुमन सिंह ने बताया कि 10 वर्ष पूर्व तक ग्रामीण दुधारू पशुओं के साथ ही खेतों में हल लगाने के लिए बैल और भेड़ बकरियां पालते थे। दुधारू पशुओं का दूध व अन्य दुग्ध पदार्थ ग्रामीण विकासनगर सहित आसपास के शहरी कस्बों में बेचकर अपनी आर्थिकी बढ़ाते थे। साथ ही भेड़ बकरी पालन से गांवों ऊन से संबंधित कुटीर उद्योग चलते थे।
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कंडी क्षेत्र का विकास प्राथमिकता में शामिल है। क्षेत्र में सिंचाई गूल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शीघ्र ही बजट स्वीकृत कराकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। साथ ही क्षेत्र को भद्रराज और मसूरी से जोड़कर पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित किया जाएगा। -सहदेव पुंडीर, सहसपुर विधायक