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सख्ती से कराएं क्लीनिक एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का पालन : डीजी
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। आचार संहिता समाप्त होने के साथ ही प्रदेश में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने को लेकर सख्ती शुरू हो गई है। शुक्रवार को स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रविंद्र थपलियाल ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को इसे कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निजी अस्पतालों में 40 फीसदी अप्रशिक्षित मेडिकल प्रैक्टिशनर मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित कार्यशाला में डॉ. थपलियाल ने कहा कि राष्ट्रीय सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार करीब 70 फीसदी मरीजों का उपचार निजी क्षेत्र में किया जा रहा है। इनमें करीब 40 फीसदी मरीजों का उपचार अप्रशिक्षित मेडिकल प्रैक्टिशनर कर रहे हैं। जिससे मरीजों के जीवन का जोखिम बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि एक्ट का कड़ाई से अनुपालन कर मरीजों को राहत दी जा सकती है। निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आरके पांडेय ने बताया कि कोई भी प्रशिक्षित चिकित्सक किसी भी नर्सिंगहोम, क्लीनिक, अस्पताल या चिकित्सा संस्थान का एक्ट में पंजीकरण कराए बिना प्रैक्टिस या चिकित्सकीय कार्य नहीं कर सकता। इस अवसर पर डॉ. कुलदीप सिंह मर्तोलिया, डॉ. अमिता उप्रेती, डॉ. अंजलि नौटियाल, डॉ. तृप्ति बहुगुणा समेत महानिदेशालय के अन्य अधिकारी और सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।
इन पद्धतियों को है मान्यता
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रविंद्र थपलियाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएमएचएस, बीएसएमएस, योगा, नेचुरोपैथी और सोवा रिगपा को मान्यता दी गई है। इन सभी पद्धतियों का ही एक्ट के अंतर्गत पंजीकरण होगा।
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देहरादून। आचार संहिता समाप्त होने के साथ ही प्रदेश में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने को लेकर सख्ती शुरू हो गई है। शुक्रवार को स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रविंद्र थपलियाल ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को इसे कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निजी अस्पतालों में 40 फीसदी अप्रशिक्षित मेडिकल प्रैक्टिशनर मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित कार्यशाला में डॉ. थपलियाल ने कहा कि राष्ट्रीय सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार करीब 70 फीसदी मरीजों का उपचार निजी क्षेत्र में किया जा रहा है। इनमें करीब 40 फीसदी मरीजों का उपचार अप्रशिक्षित मेडिकल प्रैक्टिशनर कर रहे हैं। जिससे मरीजों के जीवन का जोखिम बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि एक्ट का कड़ाई से अनुपालन कर मरीजों को राहत दी जा सकती है। निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आरके पांडेय ने बताया कि कोई भी प्रशिक्षित चिकित्सक किसी भी नर्सिंगहोम, क्लीनिक, अस्पताल या चिकित्सा संस्थान का एक्ट में पंजीकरण कराए बिना प्रैक्टिस या चिकित्सकीय कार्य नहीं कर सकता। इस अवसर पर डॉ. कुलदीप सिंह मर्तोलिया, डॉ. अमिता उप्रेती, डॉ. अंजलि नौटियाल, डॉ. तृप्ति बहुगुणा समेत महानिदेशालय के अन्य अधिकारी और सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।
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इन पद्धतियों को है मान्यता
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रविंद्र थपलियाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएमएचएस, बीएसएमएस, योगा, नेचुरोपैथी और सोवा रिगपा को मान्यता दी गई है। इन सभी पद्धतियों का ही एक्ट के अंतर्गत पंजीकरण होगा।
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