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पढ़ेंगी तभी आगे बढ़ेंगी बेटियां : डबराल
Updated Tue, 18 Dec 2018 01:59 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल महाअभियान के तहत सोमवार को महर्षि अरविंद घोष इंटर कॉलेज यमुना कॉलोनी डाकपत्थर में ‘बालिका शिक्षा एवं बेटी बचाओ’ पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल के प्रधानाचार्य अरुण डबराल ने किया। उन्होंने कहा कि बेटियां पढ़ेंगी तभी आगे बढ़ेंगी। बेटियां शिक्षित होंगी तो जग शिक्षित होगा। वे एक नहीं बल्कि दो घरों एवं समाज को शिक्षित करतीं हैं। लड़का-लड़की में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस घर में बेटियां हैं वहां संस्कार हैं। बेटियां नसीब वालों के घर जन्म लेतीं हैं। शिक्षिका शांति उनियाल ने प्रदेश में बालिकाओं के घटते लिंगानुपात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या पर जब तक पूरी तरह से रोक नहीं लगेेगी। लिंगानुपात इसी तरह से घटता जाएगा। इस पर रोक के लिए समाज के हर व्यक्ति खासकर युवाओं को आगे आना होगा। शिक्षिका सुमिता लखरवाल ने ‘नारी हूं, नारी की बस यही कहानी’ कविता की प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि समाज में महिलाओं को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने ‘बेेटी को शिक्षा से वंचित न करें’ विषय पर लघु नाटिका का मंचन किया। नाटिका का संचालन दसवीं की छात्रा अनामिका ने किया। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पर स्कूल के विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं ने संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी में संबोधित करते हुए अपने विचार रखे। वेदांशी ने ‘दिवारे ऊंची गलिया हैं तंग’ गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन नेेहा सिंह और राहुल चौधरी ने किया।
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कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
अपराजिता के तहत स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शांति उनियाल, भरत सिंह चौहान, नागचंद सहगल, संजय कुमार, शूरवीर तोमर, कमल शर्मा, अतिम कोठियाल, कुंवर सिंह राय, कौशलेंद्र पुरोहित, अंजना राणा, रेनू शर्मा, प्रतिभा विश्वकर्मा, संध्या वर्मा, संदीप, रिंकू, विकास, अनीता नयाल, मीरा, आरती, अर्चना तोमर, प्रियंका तोमर, प्रिंयका वर्मा आदि मौजूद रहे।
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पढ़-लिखकर आत्म निर्भर बनी खुशी
कार्यक्रम में ‘बेटी को शिक्षा से वंचित न करें’ लघु नाटिका के माध्यम से बच्चों ने दर्शाया कि पढ़ लिखकर ही बेटियां आत्मनिर्भर बन सकतीं हैं। नाटक में दिखाया कि खुशी अन्य बच्चों की तरह पढ़ना चाहती थी। लेकिन, उसकी दादी नहीं चाहती थी कि वह स्कूल जाए। वह स्कूल जा सके इसके लिए अन्य परिजनों ने भी उसकी दादी को समझाया। इस पर बाद में दादी मान गईं। पढ़-लिखकर खुशी जब आत्मनिर्भर बनी, तो सबसे ज्यादा खुश उसकी दादी ही थीं।
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कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए केवल कानून बना देने से काम नहीं चलेगा। इसको रोकने के लिए युवाओं को आगे आकर लोगों को जागरूक करना होगा।
- शांति उनियाल, शिक्षिका
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बेटियां एक नहीं बल्कि दो घरों एवं समाज को शिक्षित करतीं हैं, उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- रिया, छात्रा
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उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल हो या इंटरमीडिएट परीक्षाएं बालिकाओं का शानदार प्रदर्शन रहा है। इसके अलावा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी वे आगे बढ़ रही हैं।
- उन्नति, छात्रा
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प्रदेश एवं देश में घटता लिंगानुपात चिंता का विषय है। यदि इसमें सुधार नहीं किया गया, तो इसके भारी दुष्परिणाम उठाने पड़ सकते हैं। बेटी है तो कल है।
- निहारिका, छात्रा
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बालिकाओं के प्रति मानसिकता में बदलाव की जरूरत है। अब वह समय नहीं है जब महिलाएं केवल घरों तक सीमित थीं। समय के साथ-साथ खुद को भी बदलना होगा।
- चंदन सिंह चौहान, छात्र
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बेटा-बेटी में किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। बेटी तो भगवान की दी हुई भेंट होती है, जो मनुष्य के लिए सबसे अनमोल होती है।
- सचिन सागर, छात्र
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अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल महाअभियान के तहत सोमवार को महर्षि अरविंद घोष इंटर कॉलेज यमुना कॉलोनी डाकपत्थर में ‘बालिका शिक्षा एवं बेटी बचाओ’ पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल के प्रधानाचार्य अरुण डबराल ने किया। उन्होंने कहा कि बेटियां पढ़ेंगी तभी आगे बढ़ेंगी। बेटियां शिक्षित होंगी तो जग शिक्षित होगा। वे एक नहीं बल्कि दो घरों एवं समाज को शिक्षित करतीं हैं। लड़का-लड़की में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस घर में बेटियां हैं वहां संस्कार हैं। बेटियां नसीब वालों के घर जन्म लेतीं हैं। शिक्षिका शांति उनियाल ने प्रदेश में बालिकाओं के घटते लिंगानुपात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या पर जब तक पूरी तरह से रोक नहीं लगेेगी। लिंगानुपात इसी तरह से घटता जाएगा। इस पर रोक के लिए समाज के हर व्यक्ति खासकर युवाओं को आगे आना होगा। शिक्षिका सुमिता लखरवाल ने ‘नारी हूं, नारी की बस यही कहानी’ कविता की प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि समाज में महिलाओं को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
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कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने ‘बेेटी को शिक्षा से वंचित न करें’ विषय पर लघु नाटिका का मंचन किया। नाटिका का संचालन दसवीं की छात्रा अनामिका ने किया। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पर स्कूल के विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं ने संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी में संबोधित करते हुए अपने विचार रखे। वेदांशी ने ‘दिवारे ऊंची गलिया हैं तंग’ गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन नेेहा सिंह और राहुल चौधरी ने किया।
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कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
अपराजिता के तहत स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शांति उनियाल, भरत सिंह चौहान, नागचंद सहगल, संजय कुमार, शूरवीर तोमर, कमल शर्मा, अतिम कोठियाल, कुंवर सिंह राय, कौशलेंद्र पुरोहित, अंजना राणा, रेनू शर्मा, प्रतिभा विश्वकर्मा, संध्या वर्मा, संदीप, रिंकू, विकास, अनीता नयाल, मीरा, आरती, अर्चना तोमर, प्रियंका तोमर, प्रिंयका वर्मा आदि मौजूद रहे।
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पढ़-लिखकर आत्म निर्भर बनी खुशी
कार्यक्रम में ‘बेटी को शिक्षा से वंचित न करें’ लघु नाटिका के माध्यम से बच्चों ने दर्शाया कि पढ़ लिखकर ही बेटियां आत्मनिर्भर बन सकतीं हैं। नाटक में दिखाया कि खुशी अन्य बच्चों की तरह पढ़ना चाहती थी। लेकिन, उसकी दादी नहीं चाहती थी कि वह स्कूल जाए। वह स्कूल जा सके इसके लिए अन्य परिजनों ने भी उसकी दादी को समझाया। इस पर बाद में दादी मान गईं। पढ़-लिखकर खुशी जब आत्मनिर्भर बनी, तो सबसे ज्यादा खुश उसकी दादी ही थीं।
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कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए केवल कानून बना देने से काम नहीं चलेगा। इसको रोकने के लिए युवाओं को आगे आकर लोगों को जागरूक करना होगा।
- शांति उनियाल, शिक्षिका
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बेटियां एक नहीं बल्कि दो घरों एवं समाज को शिक्षित करतीं हैं, उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- रिया, छात्रा
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उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल हो या इंटरमीडिएट परीक्षाएं बालिकाओं का शानदार प्रदर्शन रहा है। इसके अलावा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी वे आगे बढ़ रही हैं।
- उन्नति, छात्रा
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प्रदेश एवं देश में घटता लिंगानुपात चिंता का विषय है। यदि इसमें सुधार नहीं किया गया, तो इसके भारी दुष्परिणाम उठाने पड़ सकते हैं। बेटी है तो कल है।
- निहारिका, छात्रा
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बालिकाओं के प्रति मानसिकता में बदलाव की जरूरत है। अब वह समय नहीं है जब महिलाएं केवल घरों तक सीमित थीं। समय के साथ-साथ खुद को भी बदलना होगा।
- चंदन सिंह चौहान, छात्र
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बेटा-बेटी में किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। बेटी तो भगवान की दी हुई भेंट होती है, जो मनुष्य के लिए सबसे अनमोल होती है।
- सचिन सागर, छात्र