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महिला की छाती से निकाला 1100 ग्राम का ट्यूमर
Updated Sat, 15 Dec 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के कार्डियाथोरेेसिक एंड वास्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) व न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने 39 वर्षीय महिला की छाती से 1100 ग्राम का ट्यूमर निकाला। एम्स के चेस्ट एंड कॉर्डियोथॉरेसिक सर्जन डॉ. अंशुमन दरबारी ने बताया कि हल्द्वानी निवासी एक महिला कुछ समय पूर्व बुखार के साथ ही सांस लेने की तकलीफ के चलते हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए गई।
छाती में बड़े साइज का ट्यूमर होने से चिकित्सकों ने वहां ऑपरेशन से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला एम्स पहुंची, संस्थान में परीक्षण के बाद महिला की छाती में आकार का ट्यूमर निकला गया। उन्होंने बताया कि इस ट्यूमर का एक बड़ा हिस्सा छाती में और कुछ भाग स्पाइनल कॉर्ड में फैला हुआ था। इसके बाद महिला की छाती का ऑपरेशन किया गया, जबकि न्यूरो सर्जन डॉ. रजनीश अरोड़ा ने स्पाइन का ऑपरेशन किया। डा. अंशुमन ने बताया कि इस तरह के ट्यूमर के ऑपरेशन में और अधिक विलंब होता तो छाती से नीचे के हिस्से में लकवा का खतरा था। साथ ही ट्यूमर के लगातार बढ़ते साइज से महिला की जान भी जा सकती थी।
उन्होंने बताया कि अब महिला पूरी तरह से स्वस्थ है, उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। एम्स में इस ऑपरेशन पर 15 हजार खर्च आया है, जबकि निजी चिकित्सालय में इस ऑपरेशन पर दो से तीन लाख रुपये का खर्च आता है। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि उत्तराखंड में राजकीय व निजी अस्पतालों में चेस्ट व कॉर्डियोथॉरेसिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसी के मद्देनजर रोगियों की सुविधा के लिए एम्स संस्थान में फेफड़े व छाती से जुड़े रोगों की सर्जरी संबंधी बेसिक सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं।
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छाती में बड़े साइज का ट्यूमर होने से चिकित्सकों ने वहां ऑपरेशन से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला एम्स पहुंची, संस्थान में परीक्षण के बाद महिला की छाती में आकार का ट्यूमर निकला गया। उन्होंने बताया कि इस ट्यूमर का एक बड़ा हिस्सा छाती में और कुछ भाग स्पाइनल कॉर्ड में फैला हुआ था। इसके बाद महिला की छाती का ऑपरेशन किया गया, जबकि न्यूरो सर्जन डॉ. रजनीश अरोड़ा ने स्पाइन का ऑपरेशन किया। डा. अंशुमन ने बताया कि इस तरह के ट्यूमर के ऑपरेशन में और अधिक विलंब होता तो छाती से नीचे के हिस्से में लकवा का खतरा था। साथ ही ट्यूमर के लगातार बढ़ते साइज से महिला की जान भी जा सकती थी।
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उन्होंने बताया कि अब महिला पूरी तरह से स्वस्थ है, उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। एम्स में इस ऑपरेशन पर 15 हजार खर्च आया है, जबकि निजी चिकित्सालय में इस ऑपरेशन पर दो से तीन लाख रुपये का खर्च आता है। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि उत्तराखंड में राजकीय व निजी अस्पतालों में चेस्ट व कॉर्डियोथॉरेसिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसी के मद्देनजर रोगियों की सुविधा के लिए एम्स संस्थान में फेफड़े व छाती से जुड़े रोगों की सर्जरी संबंधी बेसिक सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं।
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