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नदी किनारे की बस्तियों में नहीं हो पाए सुरक्षा इंतजाम
Updated Sun, 09 Dec 2018 09:55 PM IST
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कर्णप्रयाग। अलकनंदा और पिंडर नदी किनारे बसे गांवों और बस्तियों में बाढ़ से सुरक्षा के इंतजाम पूरे नहीं हो पाए हैं। लंबे समय से ग्रामीण बस्तियों केे सुरक्षा के लिए बाढ़ सुरक्षा कार्य की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन मामला में कोई पहल नहीं हुई।
विकासखंड में अलकनंदा नदी किनारे बसे देवलीबगड़, जयकंडी और कालेश्वर में ग्रामीण लगातार सुरक्षा कार्य करने की मांग कर रहे हैं। जबकि नगर से लगे शक्तिनगर, देवतोली और सिमली क्षेत्र में भी नदी किनारे की आवासीय बस्ती और भूमि को बाढ़ से सुरक्षा के लिए दीवार निर्माण की भी मांग ग्रामीणों की है। जयकंडी के प्रधान संदीप खंडूड़ी, मोहन लाल, कालेश्वर के हरीश चौहान, देवलीबगड़ की पूर्व प्रधान संजू देवी, बलवंत सिंह आदि का कहना है कि वर्ष 2013 में अलकनंदा का पानी बस्ती तक आ गया था, जिसमें कई नाली कृषि भूमि बह गई। साथ ही बाढ़ से गांव के लिए खतरा बन गया है। पिछले चार सालों से ग्रामीण यहां सुरक्षा कार्य करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वहीं शक्तिनगर निवासी प्रमोद नौटियाल का कहना है कि अलकनंदा नदी से शक्तिनगर में लगातार कटाव हो रहा है। दूसरी ओर सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता जेपी थपलियाल का कहना है कि सिमली, देवलीबगड़ी, जयकंडी, कालेश्वर सहित सभी जगह सुरक्षा कार्य के प्रस्ताव इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
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विकासखंड में अलकनंदा नदी किनारे बसे देवलीबगड़, जयकंडी और कालेश्वर में ग्रामीण लगातार सुरक्षा कार्य करने की मांग कर रहे हैं। जबकि नगर से लगे शक्तिनगर, देवतोली और सिमली क्षेत्र में भी नदी किनारे की आवासीय बस्ती और भूमि को बाढ़ से सुरक्षा के लिए दीवार निर्माण की भी मांग ग्रामीणों की है। जयकंडी के प्रधान संदीप खंडूड़ी, मोहन लाल, कालेश्वर के हरीश चौहान, देवलीबगड़ की पूर्व प्रधान संजू देवी, बलवंत सिंह आदि का कहना है कि वर्ष 2013 में अलकनंदा का पानी बस्ती तक आ गया था, जिसमें कई नाली कृषि भूमि बह गई। साथ ही बाढ़ से गांव के लिए खतरा बन गया है। पिछले चार सालों से ग्रामीण यहां सुरक्षा कार्य करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वहीं शक्तिनगर निवासी प्रमोद नौटियाल का कहना है कि अलकनंदा नदी से शक्तिनगर में लगातार कटाव हो रहा है। दूसरी ओर सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता जेपी थपलियाल का कहना है कि सिमली, देवलीबगड़ी, जयकंडी, कालेश्वर सहित सभी जगह सुरक्षा कार्य के प्रस्ताव इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
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