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बंदरों के आतंक से स्कूल में लटका ताला
Updated Mon, 12 Nov 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, श्यामपुर। तीन दशक पहले ग्राम सभा खैरीकलां में बनाये गये राजकीय प्राथमिक विद्यालय को जंगली जानवरों व बंदरों के आतंक के कारण बंद करना पड़ा। अब रखरखाव के अभाव में लाखों की लागत से बना इसका भवन जीर्णशीर्ण हो गया है। करीब तीन दशक पहले खैरीकलां के जंगल से सटे एक छोर पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय बनाया गया था। बनने के बाद दो-तीन साल विद्यालय संचालित भी हुआ, लेकिन उसके बाद विद्यालय में बंदरों व जंगली जानवरों के खौफ के कारण अभिभावकों ने बच्चों को भेजना बंद कर दिया। तब से आज तक ये विद्यालय शोपीस बना हुआ है।
विद्यालय संचालित न होने के कारण भवन भी जीर्णशीर्ण हो गया है। खैरीखुर्द के उप प्रधान निर्मल रावत ने बताया कि पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्राम सभा की बैठक में इस विद्यालय की जगह पर पंचायत भवन का प्रस्ताव पास किया है। उन्होंने कहा तीन दशक से विद्यालय यहां पर संचालित नहीं हो रहा है। भवन अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है।
कोट्स
उक्त भूमि विद्यालय के नाम पर है। शुरुआत में दो-तीन साल ये विद्यालय संचालित हुआ। बाद में बंदरों के आतंक के कारण अभिभावकों ने बच्चों को भेजना बंद कर दिया। तभी से ये विद्यालय संचालित नहीं हो रहा है। यदि पंचायत की ओर से शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा जाता है तो भूमि पंचायत को हस्तांतरित की जा सकती है।
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- मोहनलाल पेटवाल, संकुल समन्वयक, श्यामपुर।
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विद्यालय संचालित न होने के कारण भवन भी जीर्णशीर्ण हो गया है। खैरीखुर्द के उप प्रधान निर्मल रावत ने बताया कि पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्राम सभा की बैठक में इस विद्यालय की जगह पर पंचायत भवन का प्रस्ताव पास किया है। उन्होंने कहा तीन दशक से विद्यालय यहां पर संचालित नहीं हो रहा है। भवन अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है।
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उक्त भूमि विद्यालय के नाम पर है। शुरुआत में दो-तीन साल ये विद्यालय संचालित हुआ। बाद में बंदरों के आतंक के कारण अभिभावकों ने बच्चों को भेजना बंद कर दिया। तभी से ये विद्यालय संचालित नहीं हो रहा है। यदि पंचायत की ओर से शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा जाता है तो भूमि पंचायत को हस्तांतरित की जा सकती है।
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- मोहनलाल पेटवाल, संकुल समन्वयक, श्यामपुर।