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सिक्योरिटी गार्डों को दिया कार्डियक अरेस्ट का प्रशिक्षण
Updated Wed, 24 Oct 2018 01:56 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
ऋषिकेश। वर्ल्ड हार्ट रिस्टार्ट डे के अवसर पर एम्स के मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से मंगलवार को संस्थान के सिक्योरिटी गार्डों को कॉर्डियक अरेस्ट से ग्रस्त लोगों की पहचान व बचाव का प्रशिक्षण दिया गया। इस मौके पर संस्थान में कार्यरत 250 सिक्योरिटी गार्ड्स ने रोगियों की पहचान व बचाव के गुर सीखे।
बैराज रोड स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंगलवार को सिक्योरिटी गार्ड्स को ‘कप्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट कॉल्स’ की ट्रेनिंग दी गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉ. रविकांत ने कहा कि जीवन अमूल्य है। लिहाजा एम्स जैसे मेडिकल संस्थान में कार्यरत सभी कर्मचारियों के लिए इस तरह का प्रशिक्षण जरूरी है। जिससे चिकित्सा सहायता मिलने से पूर्व ग्रस्त रोगी की फौरी सहायता देकर उसकी जान बचाई जा सके।
बतौर मास्टर ट्रेनर विभाग की प्रोफेसर डॉ. मनीषा नैथानी ने बताया कि कॉर्डियक अरेस्ट से ग्रस्त व्यक्ति की जान बचाने के लिए कंप्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट कॉल्स की जानकारी अहम है। कप्रेशन से भी महज पांच से छह मिनट में किसी रोगी की जान बचाई जा सकती है। प्रशिक्षण के बाद लिखित व प्रयोगात्मक परीक्षा ली गई और प्रमाणपत्र दिए गए। डॉ. नैथानी ने बताया कि इसके बाद संस्थान के अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. शालिनी राव, डॉ. वसंता कल्याणी, डॉ. रुपिंदर देयोल, डॉ. मलार कोडी एस, डॉ. पद्मानिधि अग्रवाल, डॉ. कनव जैन, डॉ. क्रांति कुमार रेड्डी, अमृतवर्षा, दिव्या चावला, अरुण वर्गेश आदि मौजूद रहे।
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ऋषिकेश। वर्ल्ड हार्ट रिस्टार्ट डे के अवसर पर एम्स के मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से मंगलवार को संस्थान के सिक्योरिटी गार्डों को कॉर्डियक अरेस्ट से ग्रस्त लोगों की पहचान व बचाव का प्रशिक्षण दिया गया। इस मौके पर संस्थान में कार्यरत 250 सिक्योरिटी गार्ड्स ने रोगियों की पहचान व बचाव के गुर सीखे।
बैराज रोड स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंगलवार को सिक्योरिटी गार्ड्स को ‘कप्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट कॉल्स’ की ट्रेनिंग दी गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉ. रविकांत ने कहा कि जीवन अमूल्य है। लिहाजा एम्स जैसे मेडिकल संस्थान में कार्यरत सभी कर्मचारियों के लिए इस तरह का प्रशिक्षण जरूरी है। जिससे चिकित्सा सहायता मिलने से पूर्व ग्रस्त रोगी की फौरी सहायता देकर उसकी जान बचाई जा सके।
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बतौर मास्टर ट्रेनर विभाग की प्रोफेसर डॉ. मनीषा नैथानी ने बताया कि कॉर्डियक अरेस्ट से ग्रस्त व्यक्ति की जान बचाने के लिए कंप्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट कॉल्स की जानकारी अहम है। कप्रेशन से भी महज पांच से छह मिनट में किसी रोगी की जान बचाई जा सकती है। प्रशिक्षण के बाद लिखित व प्रयोगात्मक परीक्षा ली गई और प्रमाणपत्र दिए गए। डॉ. नैथानी ने बताया कि इसके बाद संस्थान के अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. शालिनी राव, डॉ. वसंता कल्याणी, डॉ. रुपिंदर देयोल, डॉ. मलार कोडी एस, डॉ. पद्मानिधि अग्रवाल, डॉ. कनव जैन, डॉ. क्रांति कुमार रेड्डी, अमृतवर्षा, दिव्या चावला, अरुण वर्गेश आदि मौजूद रहे।
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