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बुग्यालों में पर्यटक नहीं आने से होम स्अे योजना पर ताला
Updated Sat, 13 Oct 2018 10:12 PM IST
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देवाल। रूपकुंड-वेदनी बुग्याल में पर्यटकों के रात्रि विश्राम पर रोक लगने से दीदना और वाण गांव में संचालित होम स्टे पर ताला लटक गया है। ऐसे में इस व्यवसाय से जुड़े कई युवा आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
हाईकोर्ट की ओर से बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर रोक लगाने से मुख्य पर्यटन स्थल रूपकुंड, वेदनी, बगुवावासा सहित सभी बुग्यालों में पर्यटकों का आना-जाना बंद हो गया है। ऐसे में यहां होम स्टे से ब्लाक के 30 परिवारों की आर्थिकी जुड़ी थी जो अब ठप हो गई है। होम स्टे संचालित करने वाले भुवन बिष्ट, महिपत सिंह, पान सिंह, बलबीर सिंह, देव सिंह, प्रेम सिंह, देवेंद्र सिंह, जयवीर सिंह, महिपत सिंह आदि ने बताया कि वाण और दीदना अंतिम आबादी वाले गांव हैं। यहां पर पर्यटकों को सुविधा देने के लिए बेरोजगारों ने बैंक से लोन लेकर होम स्टे बनाए थे, लेकिन एक सितंबर से होम स्टे वीरान पड़े हैं। दीदना में श्रीनंदा देवी होम स्टे के संचालक भुवन बिष्ट ने बताया कि पिछले साल एक परिवार की एक लाख से अधिक की आय हुई थी, लेकिन सरकार की ओर से यदि बुग्यालों में रात्रि विश्राम का कोई विकल्प नहीं खोजा गया तो यहां योजना ठप हो जाएगी। जिला पर्यटन अधिकारी विजेंद्र पांडे का कहना है कि यहां कई ऐसे प्रमुख बुग्याल हैं, जहां पर बिना रात्रि विश्राम के नहीं पहुंचा जा सकता है। बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर रोक लगने से इसका तत्काल प्रभाव होम स्टे पर पड़ा है।
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हाईकोर्ट की ओर से बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर रोक लगाने से मुख्य पर्यटन स्थल रूपकुंड, वेदनी, बगुवावासा सहित सभी बुग्यालों में पर्यटकों का आना-जाना बंद हो गया है। ऐसे में यहां होम स्टे से ब्लाक के 30 परिवारों की आर्थिकी जुड़ी थी जो अब ठप हो गई है। होम स्टे संचालित करने वाले भुवन बिष्ट, महिपत सिंह, पान सिंह, बलबीर सिंह, देव सिंह, प्रेम सिंह, देवेंद्र सिंह, जयवीर सिंह, महिपत सिंह आदि ने बताया कि वाण और दीदना अंतिम आबादी वाले गांव हैं। यहां पर पर्यटकों को सुविधा देने के लिए बेरोजगारों ने बैंक से लोन लेकर होम स्टे बनाए थे, लेकिन एक सितंबर से होम स्टे वीरान पड़े हैं। दीदना में श्रीनंदा देवी होम स्टे के संचालक भुवन बिष्ट ने बताया कि पिछले साल एक परिवार की एक लाख से अधिक की आय हुई थी, लेकिन सरकार की ओर से यदि बुग्यालों में रात्रि विश्राम का कोई विकल्प नहीं खोजा गया तो यहां योजना ठप हो जाएगी। जिला पर्यटन अधिकारी विजेंद्र पांडे का कहना है कि यहां कई ऐसे प्रमुख बुग्याल हैं, जहां पर बिना रात्रि विश्राम के नहीं पहुंचा जा सकता है। बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर रोक लगने से इसका तत्काल प्रभाव होम स्टे पर पड़ा है।
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