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मां की इच्छा पूरी करने कष्टकारी यात्रा पर निकला करन
Updated Sat, 04 Aug 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
श्रावण मास की नीलकंठ धाम की कांवड़ यात्रा में आस्था के अनेक रंग देखने को मिल रहे हैं। शुक्रवार को स्वर्गाश्रम में गंगा स्नान के बाद नन्हें शिवभक्त करन कुमार ने लेट लेटकर कर प्राचीन नीलंकठ धाम की कष्टकारी यात्रा शुरू की। 12 वर्षीय करन सुबह स्वर्गाश्रम पहुंचे और गंगा में डुबकी लगाने के बाद नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन को पैदल मार्ग यात्रा शुरू की। इस दौरान नन्हें शिवभक्त ने बताया कि वह अपनी मां की अंतिम इच्छा पूूरी करने के लिए नीलकंठ महादेव की पैदल यात्रा कर रहा है। वह अपने रिश्तेदार के साथ यात्रा पर निकला है।
करन कुमार ने बताया कि उसकी मां अक्सर नीलकंठ की यात्रा पर जाने की बात कहती थी। वह अपने परिवार की खुशियों की कामना के लिए भगवान नीलकंठ के दरबार में रेंगते हुए यात्रा करना चाहती थी, मगर गत वर्ष अचानक सड़क दुर्घटना में उसकी मां पिंकी देवी दुनिया छोड़कर चल बसी। लिहाजा उनकी इस इच्छा को जानकर नन्हें बेटे ने अपनी मां की नीलकंठ की कष्टकारी पैदल यात्रा पर निकलने का संकल्प लिया और माता की अंतिम इच्छा को पूरी करने को भगवान नीलकंठ के दरबार में शीश नवाने चल पड़ा। करन ने बताया कि उसके परिवार में उसके पिता कालूचंद और एक बहन खुशी ललतारौं, हरिद्वार में रहते हैं। करन ने बताया कि वह अपने घर के पास ही स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ता है।
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श्रावण मास की नीलकंठ धाम की कांवड़ यात्रा में आस्था के अनेक रंग देखने को मिल रहे हैं। शुक्रवार को स्वर्गाश्रम में गंगा स्नान के बाद नन्हें शिवभक्त करन कुमार ने लेट लेटकर कर प्राचीन नीलंकठ धाम की कष्टकारी यात्रा शुरू की। 12 वर्षीय करन सुबह स्वर्गाश्रम पहुंचे और गंगा में डुबकी लगाने के बाद नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन को पैदल मार्ग यात्रा शुरू की। इस दौरान नन्हें शिवभक्त ने बताया कि वह अपनी मां की अंतिम इच्छा पूूरी करने के लिए नीलकंठ महादेव की पैदल यात्रा कर रहा है। वह अपने रिश्तेदार के साथ यात्रा पर निकला है।
करन कुमार ने बताया कि उसकी मां अक्सर नीलकंठ की यात्रा पर जाने की बात कहती थी। वह अपने परिवार की खुशियों की कामना के लिए भगवान नीलकंठ के दरबार में रेंगते हुए यात्रा करना चाहती थी, मगर गत वर्ष अचानक सड़क दुर्घटना में उसकी मां पिंकी देवी दुनिया छोड़कर चल बसी। लिहाजा उनकी इस इच्छा को जानकर नन्हें बेटे ने अपनी मां की नीलकंठ की कष्टकारी पैदल यात्रा पर निकलने का संकल्प लिया और माता की अंतिम इच्छा को पूरी करने को भगवान नीलकंठ के दरबार में शीश नवाने चल पड़ा। करन ने बताया कि उसके परिवार में उसके पिता कालूचंद और एक बहन खुशी ललतारौं, हरिद्वार में रहते हैं। करन ने बताया कि वह अपने घर के पास ही स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ता है।
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