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बेस अस्पताल की सफाई व्यवस्था हुई बीमार
Updated Wed, 25 Jul 2018 10:48 PM IST
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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल की सफाई व्यवस्था के बुरे हाल हैं। तीन माह बाद भी सफाई व्यवस्था के लिए नई एजेंसी से अनुबंध नहीं हो पाया है। वहीं, संस्थान ने अस्पताल की सफाई व्यवस्था के लिए तीसरी बार टेंडर आमंत्रित कर दिए हैं।
विगत 15 अप्रैल को बेस अस्पताल की सफाई व्यवस्था देख रही आउट सोर्सिंग कंपनी का टेंडर खत्म हो गया था, जबकि टेंडर समाप्त होने से पूर्व नए टेंडर स्वीकृत हो जाने चाहिए थे। हालांकि अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद कुछ दिन तक कॉलेज प्रशासन ने कंपनी का अनुबंध बढ़ाकर काम चलाने की कोशिश की, लेकिन सफाई कर्मियों ने वेतन व पीएफ भुगतान न होने होने पर काम करने से मना कर दिया। इसके बाद से मेडिकल कॉलेज के 25 सफाई कर्मचारियों को काम पर लगाया गया है। इसमें से भी कई बार कम ही कर्मचारी अस्पताल में आते हैं। दिक्कत यह है कि पूर्व में अस्पताल में 60 सफाई कर्मचारी रोटेशन में 24 घंटे काम करते थे। अब कर्मचारियों की कमी से नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। एक-एक सफाई कर्मचारी को दो-तीन वार्ड देखने पड़ रहे हैं। इधर, सफाई व्यवस्था के लिए संस्थान को फर्म नहीं मिल पा रही है। दो बार के टेेंडर निरस्त होने के बाद तीसरी बार के टेंडर आमंत्रित कर दिए गए हैं। वित्त नियंत्रक विवेक स्वरूप का कहना है कि अगले माह टेंडर खुल जाएंगे। हमारा प्रयास है कि शीघ्र से शीघ्र सारी प्रक्रिया निपटने के बाद फर्म काम करना शुरू कर दे।
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विगत 15 अप्रैल को बेस अस्पताल की सफाई व्यवस्था देख रही आउट सोर्सिंग कंपनी का टेंडर खत्म हो गया था, जबकि टेंडर समाप्त होने से पूर्व नए टेंडर स्वीकृत हो जाने चाहिए थे। हालांकि अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद कुछ दिन तक कॉलेज प्रशासन ने कंपनी का अनुबंध बढ़ाकर काम चलाने की कोशिश की, लेकिन सफाई कर्मियों ने वेतन व पीएफ भुगतान न होने होने पर काम करने से मना कर दिया। इसके बाद से मेडिकल कॉलेज के 25 सफाई कर्मचारियों को काम पर लगाया गया है। इसमें से भी कई बार कम ही कर्मचारी अस्पताल में आते हैं। दिक्कत यह है कि पूर्व में अस्पताल में 60 सफाई कर्मचारी रोटेशन में 24 घंटे काम करते थे। अब कर्मचारियों की कमी से नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। एक-एक सफाई कर्मचारी को दो-तीन वार्ड देखने पड़ रहे हैं। इधर, सफाई व्यवस्था के लिए संस्थान को फर्म नहीं मिल पा रही है। दो बार के टेेंडर निरस्त होने के बाद तीसरी बार के टेंडर आमंत्रित कर दिए गए हैं। वित्त नियंत्रक विवेक स्वरूप का कहना है कि अगले माह टेंडर खुल जाएंगे। हमारा प्रयास है कि शीघ्र से शीघ्र सारी प्रक्रिया निपटने के बाद फर्म काम करना शुरू कर दे।
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