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पांच दिन बाद चीला पावर हाउस में विद्युत उत्पादन शुरू
Updated Thu, 19 Jul 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम की चीला पावर हाउस परियोजना में पांच दिन से ठप विद्युत उत्पादन बुधवार से शुरू हो गया है। हालांकि, चार में से एक ही टरबाइन चालू हो सकी है जबकि तीन टरबाइन अभी भी बंद हैं। काफी जद्दोजहद के बाद भी निगम के तकनीकी विशेषज्ञ एक टरबाइन से विद्युत उत्पादन शुरू कर पाए हैं। पांच दिन से बंद बिजली उत्पादन से निगम को अभी तक करीब 15 मिलियन यूनिट का नुकसान हो चुका है। निगम के मुताबिक शक्ति नहर पर स्थापित 144 मेगावाट की चीला पावर हाउस परियोजना की चार टरबाइनों में से एक की मरम्मत बुधवार को पूरी कर उससे विद्युत उत्पादन शुरू कर दिया गया है।
टरबाइन से करीब 36 मेगावाट बिजली उत्पन्न होने से ऊर्जा संकट को थोड़ा कम करने में निगम को मदद मिली है। जल्द ही अन्य तीन टरबाइनों को भी दुरुस्त कर उनसे विद्युत उत्पादन शुरू किया जाएगा। गौरतलब है कि बीती 13 जुलाई को चीला पावर हाउस की चारों टरबाइन तकनीकी कारणों के चलते बंद हो गई थी। टरबाइनों के ठप होने से पावर हाउस में उत्पादन बंद हो गया है, जिसका असर सीधे प्रदेश में विद्युत संचालन पर पड़ रहा था। पावर हाउस में विद्युत उत्पादन ठप होने से ग्रिड तक पर्याप्त बिजली नहीं पहुंच रही थी।
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उत्तराखंड जल विद्युत निगम की चीला पावर हाउस परियोजना में पांच दिन से ठप विद्युत उत्पादन बुधवार से शुरू हो गया है। हालांकि, चार में से एक ही टरबाइन चालू हो सकी है जबकि तीन टरबाइन अभी भी बंद हैं। काफी जद्दोजहद के बाद भी निगम के तकनीकी विशेषज्ञ एक टरबाइन से विद्युत उत्पादन शुरू कर पाए हैं। पांच दिन से बंद बिजली उत्पादन से निगम को अभी तक करीब 15 मिलियन यूनिट का नुकसान हो चुका है। निगम के मुताबिक शक्ति नहर पर स्थापित 144 मेगावाट की चीला पावर हाउस परियोजना की चार टरबाइनों में से एक की मरम्मत बुधवार को पूरी कर उससे विद्युत उत्पादन शुरू कर दिया गया है।
टरबाइन से करीब 36 मेगावाट बिजली उत्पन्न होने से ऊर्जा संकट को थोड़ा कम करने में निगम को मदद मिली है। जल्द ही अन्य तीन टरबाइनों को भी दुरुस्त कर उनसे विद्युत उत्पादन शुरू किया जाएगा। गौरतलब है कि बीती 13 जुलाई को चीला पावर हाउस की चारों टरबाइन तकनीकी कारणों के चलते बंद हो गई थी। टरबाइनों के ठप होने से पावर हाउस में उत्पादन बंद हो गया है, जिसका असर सीधे प्रदेश में विद्युत संचालन पर पड़ रहा था। पावर हाउस में विद्युत उत्पादन ठप होने से ग्रिड तक पर्याप्त बिजली नहीं पहुंच रही थी।
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