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मथकोट गांव में पेयजल लाइन टूटने से हो रही पेयजल आपूर्ति बाधित, ग्रामीण परेशान
Updated Sat, 23 Jun 2018 10:32 PM IST
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गोपेश्वर। मथकोट गांव की पेयजल लाइन बार-बार क्षतिग्रस्त होने और गांव के तीन पेयजल स्रोत सूखने से गांव में पेयजल किल्लत बनी हुई है। ग्रामीणों ने जल संस्थान से पेयजल योजना के पुनर्गठन की मांग उठाई।
घाट ब्लॉक के मथकोट गांव में 90 परिवारों के करीब 500 ग्रामीण रहते हैं। गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए दो दशक पूर्व पांच किमी लंबी रामणी-मथकोट पेयजल योजना का निर्माण किया गया था। योजना से वर्ष 2010 तक गांव में सुचारु पेयजल आपूर्ति की गई, लेकिन वर्ष 2010 की आपदा के दौरान पेयजल लाइन कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई और गांव के तीन प्राकृतिक जल स्रोत भी सूख गए। अब गांव में पानी की आपूर्ति के लिए रामणी-मथकोट पेयजल लाइन ही एकमात्र जरिया है, लेकिन यहां भी बार-बार पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है। यशपाल आर्य, देवेंद्र सिंह, जसपाल सिंह और मधुली देवी का कहना है कि कई बार जल संस्थान और जिला प्रशासन के अधिकारियों से पेयजल योजना के पुनर्गठन की मांग की गई, लेकिन वर्तमान तक स्थिति जस की तस है। दूरस्थ स्रोतों से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पीके सैनी का कहना है कि रामणी-मथकोट पेयजल लाइन मल्टी विलेज वाटर स्कीम है। क्षेत्र में जनसंख्या बढ़ने के चलते अब मांग के सापेक्ष पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। यदि ग्रामीणों की ओर से प्रस्ताव दिया जाता है तो पेयजल योजना के पुनर्गठन का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
घाट ब्लॉक के मथकोट गांव में 90 परिवारों के करीब 500 ग्रामीण रहते हैं। गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए दो दशक पूर्व पांच किमी लंबी रामणी-मथकोट पेयजल योजना का निर्माण किया गया था। योजना से वर्ष 2010 तक गांव में सुचारु पेयजल आपूर्ति की गई, लेकिन वर्ष 2010 की आपदा के दौरान पेयजल लाइन कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई और गांव के तीन प्राकृतिक जल स्रोत भी सूख गए। अब गांव में पानी की आपूर्ति के लिए रामणी-मथकोट पेयजल लाइन ही एकमात्र जरिया है, लेकिन यहां भी बार-बार पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है। यशपाल आर्य, देवेंद्र सिंह, जसपाल सिंह और मधुली देवी का कहना है कि कई बार जल संस्थान और जिला प्रशासन के अधिकारियों से पेयजल योजना के पुनर्गठन की मांग की गई, लेकिन वर्तमान तक स्थिति जस की तस है। दूरस्थ स्रोतों से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पीके सैनी का कहना है कि रामणी-मथकोट पेयजल लाइन मल्टी विलेज वाटर स्कीम है। क्षेत्र में जनसंख्या बढ़ने के चलते अब मांग के सापेक्ष पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। यदि ग्रामीणों की ओर से प्रस्ताव दिया जाता है तो पेयजल योजना के पुनर्गठन का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
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