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गढ़वाल महासभा ने किया फिल्म अभिनेता को सम्मानित
Updated Wed, 13 Jun 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश ।
उत्तराखंडी फिल्म अभिनेता व फीचर फिल्म मेजर निराला के नायक राजेश मालगुड़ी को गढ़वाल महासभा की ओर से स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर करीब दो दर्जन से अधिक छोटी-बड़ी आंचलिक फिल्मों में विभिन्न भूमिकाएं निभा चुके अभिनेता राजेश मालगुड़ी ने बताया कि मेजर निराला अब तक की सबसे बड़े बजट की फिल्म है, जिसे उत्तराखंड ही नहीं विभिन्न प्रदेशों के साथ ही विदेशों में भी प्रदर्शित किए जाने की तैयारी है।
बताया कि फिल्म को अन्य भाषाओं में भी रिलीज की जाएगी। इस मौके पर गढ़वाल महासभा के अध्यक्ष डॉ. राजे नेगी ने कहा कि राज्य बनने के डेढ़ दशक से अधिक समय अंतराल के बाद भी अब तक की राज्य सरकारों का रवैया आंचलिक फिल्म इंडस्ट्री को लेकर तंग रहा है। जिसका खामियाजा यहां के फिल्मकारों व लोक कलाकारों को भुगतना पड़ रहा है। राज्य सरकार आज तक कोई ठोस फिल्म नीति तैयार नहीं कर पाई है, जिससे लोकभाषा से जुड़ी फिल्मों व कलाकारों को प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है।
उत्तराखंड फिल्म विकास बोर्ड व लोक भाषा अकादमी के गठन में अब तक की राज्य सरकारें फेल साबित रही हैं। यही कारण है कि वर्तमान युवा पीढ़ी अपनी बोली- भाषा व संस्कृति से दूर होती जा रही है। इस अवसर पर गायक धूम सिंह रावत, उत्तम सिंह असवाल, रवि कुकरेती, यशवीर रांगड़, आशुतोष कुड़ियाल, मनोज नेगी, मनोज नौटियाल, लक्ष्मण असवाल आदि मौजूद थे।
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उत्तराखंडी फिल्म अभिनेता व फीचर फिल्म मेजर निराला के नायक राजेश मालगुड़ी को गढ़वाल महासभा की ओर से स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर करीब दो दर्जन से अधिक छोटी-बड़ी आंचलिक फिल्मों में विभिन्न भूमिकाएं निभा चुके अभिनेता राजेश मालगुड़ी ने बताया कि मेजर निराला अब तक की सबसे बड़े बजट की फिल्म है, जिसे उत्तराखंड ही नहीं विभिन्न प्रदेशों के साथ ही विदेशों में भी प्रदर्शित किए जाने की तैयारी है।
बताया कि फिल्म को अन्य भाषाओं में भी रिलीज की जाएगी। इस मौके पर गढ़वाल महासभा के अध्यक्ष डॉ. राजे नेगी ने कहा कि राज्य बनने के डेढ़ दशक से अधिक समय अंतराल के बाद भी अब तक की राज्य सरकारों का रवैया आंचलिक फिल्म इंडस्ट्री को लेकर तंग रहा है। जिसका खामियाजा यहां के फिल्मकारों व लोक कलाकारों को भुगतना पड़ रहा है। राज्य सरकार आज तक कोई ठोस फिल्म नीति तैयार नहीं कर पाई है, जिससे लोकभाषा से जुड़ी फिल्मों व कलाकारों को प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है।
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उत्तराखंड फिल्म विकास बोर्ड व लोक भाषा अकादमी के गठन में अब तक की राज्य सरकारें फेल साबित रही हैं। यही कारण है कि वर्तमान युवा पीढ़ी अपनी बोली- भाषा व संस्कृति से दूर होती जा रही है। इस अवसर पर गायक धूम सिंह रावत, उत्तम सिंह असवाल, रवि कुकरेती, यशवीर रांगड़, आशुतोष कुड़ियाल, मनोज नेगी, मनोज नौटियाल, लक्ष्मण असवाल आदि मौजूद थे।
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