{"_id":"5b1812a54f1c1b644d8b51a1","slug":"15283042971-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहर क्षतिग्रस्त, पांच गांवों में सिंचाई का संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहर क्षतिग्रस्त, पांच गांवों में सिंचाई का संकट
Updated Wed, 06 Jun 2018 10:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कर्णप्रयाग। गैरसैंण ब्लाक में सिंचाई विभाग की कालीमाटी नहर छह माह क्षतिग्रस्त है। ऐसे में नहर से लाभान्वित होने वाले पांच गांवों में सिंचाई का संकट बना है। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग पर नहर की मरम्मत न करने का आरोप लगाया।
ब्लाक के मालकोट, गड़ौत, सेरा, तेवाखर्क और कालीमाटी गांवों के लिए रामगंगा से बनी करीब पांच किमी लंबी नहर से सिंचाई होती है। ग्रामीण दीवान सिंह रौथाण, बलवंत सिंह, बीरा देवी, दरवान सिंह, प्रेम सिंह, सावित्री देवी, कुंदन सिंह, चंद्र सिंह, जुपुली देवी, दिलबर सिंह, खीम सिंह, अवतार सिंह कोटिया, नंदी देवी और विमला देवी आदि का कहना है कि नहर दस सालों से जर्जर हाल में है, लेकिन पिछले छह माह से नहर पर पानी आना बंद हो गया है। ऐसे में पांच गांवों की सैकड़ों नाली सिंचित भूमि बंजर होने के कगार पर है। ग्रामीणों ने कहा कि पांचों गांवों में धान का उत्पादन होता है। इस क्षेत्र को गैरसैंण ब्लाक का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां कई किसान धान का उत्पादन कर बाजार तक भी पहुंचाते हैं, लेकिन इस बार नहर क्षतिग्रस्त होने से किसानों के सामने संकट हो गया है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि नहर की जल्द मरम्मत नहीं की गई तो इस बार खेतों में सिंचाई कैसे होगी यह समस्या बनी है। दूसरी ओर सिंचाई विभाग के अवर अभियंता धनवंत्री त्रिपाठी का कहना है कि नहर की मरम्मत के लिए पैसा नहीं मिल पा रहा है। हालांकि जर्जर नहर में किसी तरह पानी चलाने का प्रयास किया जा रहा था, लेेकिन नहर कई जगह क्षतिग्रस्त होने के चलते नहर के अंतिम हिस्से से जुड़े सेरा सहित अन्य दो गांवों को पानी नहीं मिल रहा था। ऐसे में मनरेगा के तहत नहर की मरम्मत किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
ब्लाक के मालकोट, गड़ौत, सेरा, तेवाखर्क और कालीमाटी गांवों के लिए रामगंगा से बनी करीब पांच किमी लंबी नहर से सिंचाई होती है। ग्रामीण दीवान सिंह रौथाण, बलवंत सिंह, बीरा देवी, दरवान सिंह, प्रेम सिंह, सावित्री देवी, कुंदन सिंह, चंद्र सिंह, जुपुली देवी, दिलबर सिंह, खीम सिंह, अवतार सिंह कोटिया, नंदी देवी और विमला देवी आदि का कहना है कि नहर दस सालों से जर्जर हाल में है, लेकिन पिछले छह माह से नहर पर पानी आना बंद हो गया है। ऐसे में पांच गांवों की सैकड़ों नाली सिंचित भूमि बंजर होने के कगार पर है। ग्रामीणों ने कहा कि पांचों गांवों में धान का उत्पादन होता है। इस क्षेत्र को गैरसैंण ब्लाक का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां कई किसान धान का उत्पादन कर बाजार तक भी पहुंचाते हैं, लेकिन इस बार नहर क्षतिग्रस्त होने से किसानों के सामने संकट हो गया है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि नहर की जल्द मरम्मत नहीं की गई तो इस बार खेतों में सिंचाई कैसे होगी यह समस्या बनी है। दूसरी ओर सिंचाई विभाग के अवर अभियंता धनवंत्री त्रिपाठी का कहना है कि नहर की मरम्मत के लिए पैसा नहीं मिल पा रहा है। हालांकि जर्जर नहर में किसी तरह पानी चलाने का प्रयास किया जा रहा था, लेेकिन नहर कई जगह क्षतिग्रस्त होने के चलते नहर के अंतिम हिस्से से जुड़े सेरा सहित अन्य दो गांवों को पानी नहीं मिल रहा था। ऐसे में मनरेगा के तहत नहर की मरम्मत किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
विज्ञापन