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हर ग्रामीणको दिया जाए आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण
Updated Mon, 28 May 2018 10:35 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के भूगोल विभाग की ओर से उत्तराखंड आपदा राहत बचाव पुनर्वास एवं आजीविका कार्य पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि पहाड़ और आपदाएं एक दूसरे का पर्याय बन चुके हैं। इसके लिए जरूरी है, कि ग्रामीणों को आपदा से जुड़े प्रशिक्षण मुहैया कराए जाए।
सोमवार को चौरास परिसर में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ पूर्व काबीना मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से आपदारोधी सुरक्षित आवास बनाए जाते थे, लेकिन आधुनिक दौर में ईंट सीमेंट और सरिया से भवनों का निर्माण किया जा रहा है। भूगोल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर मोहन सिंह पंवार ने कहा कि केदारनाथ में आई आपदा के कारणों की जानना आवश्यक है, जिससे भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो। डा. पंवार ने कहा कि विभाग के छात्र व शोध छात्र केदारनाथ जाकर इस संबंध में अध्ययन करेंगे। मानव विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. विद्या सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान में परंपरागत आपदा प्रबंधन को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। वहीं पर्वतीय शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि उत्तराखंड आपदा के दृष्टिकोण से संवेदनशील है। इसलिए प्रत्येक गांव को आपदा आधारित सूक्ष्म स्तरीय नियोजन तैयार किया जाना आवश्यक है। कार्यशाला में राहुल राणा, मनीष कुमार, दीप्ति सेमवाल, मोहम्मद तारिफ, ममता रावत आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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सोमवार को चौरास परिसर में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ पूर्व काबीना मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से आपदारोधी सुरक्षित आवास बनाए जाते थे, लेकिन आधुनिक दौर में ईंट सीमेंट और सरिया से भवनों का निर्माण किया जा रहा है। भूगोल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर मोहन सिंह पंवार ने कहा कि केदारनाथ में आई आपदा के कारणों की जानना आवश्यक है, जिससे भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो। डा. पंवार ने कहा कि विभाग के छात्र व शोध छात्र केदारनाथ जाकर इस संबंध में अध्ययन करेंगे। मानव विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. विद्या सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान में परंपरागत आपदा प्रबंधन को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। वहीं पर्वतीय शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि उत्तराखंड आपदा के दृष्टिकोण से संवेदनशील है। इसलिए प्रत्येक गांव को आपदा आधारित सूक्ष्म स्तरीय नियोजन तैयार किया जाना आवश्यक है। कार्यशाला में राहुल राणा, मनीष कुमार, दीप्ति सेमवाल, मोहम्मद तारिफ, ममता रावत आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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