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14 साल में नहीं बनी छह गांवों की सड़क
Updated Fri, 11 May 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
यमकेश्वर प्रखंड में छह ग्रामसभाओं की महज दस किमी. सड़क 14 साल बाद भी नहीं बन पाई है, जिसके कारण ग्रामीण पगडंडियां नापने को विवश हैं। लोक निर्माण विभाग की ओर से शासन को भेजे गए प्रस्ताव के तहत महज तीन किमी. सड़क को मंजूरी मिल पाई है, जिससे दो ग्रामसभाएं ही जुड़ पाई हैं। स्थानीय ग्रामीण दशकों से प्रखंड के आधा दर्जन गांवों को जोड़ने के लिए सड़क निर्माण की मांग उठाते आ रहे हैं, जिसके बाद वर्ष 2004 में प्रस्तावित मागथा-बोंगा-मुसराली, बीरकाटल-बैरागढ़ संपर्क मार्ग में से जिला प्लान के तहत प्रथम चरण में डेढ़ किमी मंजूरी मिली, इसके बाद इसका डेढ़ किमी. और विस्तारीकरण किया गया। उक्त तीन किमी. मार्ग की कटिंग तो हुई, मगर डामरीकरण आज तक नहीं हो पाया।
तीन किमी. मार्ग से दो ग्रामसभाओं के मागथा, डौंराणा व बोंगा गांव जुड़ पाए हैं, जबकि इसके बाद सात किमी. मार्ग के विस्तारीकरण प्रस्ताव को आज तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। मुसराली, बीरकाटल, सेरा आदि कई गांवों के लोग सड़क की सुविधा से वंचित हैं। स्थानीय ग्रामीण संजय भट्ट, केपी भट्ट, जीपी कंडवाल, विनोद कुमार आदि का कहना है कि मार्ग निर्माण की मांग को लेकर वर्षों से लोक निर्माण विभाग से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से गुहार लगाई जा रही है। बावजूद इसके इस ओर कोई गौर करने को तैयार नहीं है। जिससे लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मार्ग के प्रथम चरण की स्वीकृति के तहत दो किलोमीटर सड़क का अस्थायी निर्माण हो चुका है, इसके विस्तारीकरण के लितए डीपीआर तैयार की जा रही है। जिसे मंजूरी के लिए जल्द शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद मार्ग के एक्सटेंशन का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
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- सत्यप्रकाश राठौर, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी दुगड्डा डिवीजन।
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यमकेश्वर प्रखंड में छह ग्रामसभाओं की महज दस किमी. सड़क 14 साल बाद भी नहीं बन पाई है, जिसके कारण ग्रामीण पगडंडियां नापने को विवश हैं। लोक निर्माण विभाग की ओर से शासन को भेजे गए प्रस्ताव के तहत महज तीन किमी. सड़क को मंजूरी मिल पाई है, जिससे दो ग्रामसभाएं ही जुड़ पाई हैं। स्थानीय ग्रामीण दशकों से प्रखंड के आधा दर्जन गांवों को जोड़ने के लिए सड़क निर्माण की मांग उठाते आ रहे हैं, जिसके बाद वर्ष 2004 में प्रस्तावित मागथा-बोंगा-मुसराली, बीरकाटल-बैरागढ़ संपर्क मार्ग में से जिला प्लान के तहत प्रथम चरण में डेढ़ किमी मंजूरी मिली, इसके बाद इसका डेढ़ किमी. और विस्तारीकरण किया गया। उक्त तीन किमी. मार्ग की कटिंग तो हुई, मगर डामरीकरण आज तक नहीं हो पाया।
तीन किमी. मार्ग से दो ग्रामसभाओं के मागथा, डौंराणा व बोंगा गांव जुड़ पाए हैं, जबकि इसके बाद सात किमी. मार्ग के विस्तारीकरण प्रस्ताव को आज तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। मुसराली, बीरकाटल, सेरा आदि कई गांवों के लोग सड़क की सुविधा से वंचित हैं। स्थानीय ग्रामीण संजय भट्ट, केपी भट्ट, जीपी कंडवाल, विनोद कुमार आदि का कहना है कि मार्ग निर्माण की मांग को लेकर वर्षों से लोक निर्माण विभाग से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से गुहार लगाई जा रही है। बावजूद इसके इस ओर कोई गौर करने को तैयार नहीं है। जिससे लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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मार्ग के प्रथम चरण की स्वीकृति के तहत दो किलोमीटर सड़क का अस्थायी निर्माण हो चुका है, इसके विस्तारीकरण के लितए डीपीआर तैयार की जा रही है। जिसे मंजूरी के लिए जल्द शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद मार्ग के एक्सटेंशन का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
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- सत्यप्रकाश राठौर, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी दुगड्डा डिवीजन।