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16 विद्यालयों में सात साल से लगे हैं ताले
Updated Tue, 08 May 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
त्यूनी।
एक ओर प्रदेश सरकार पहाड़ों पर नौनिहालों को घर के पास ही अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, लेकिन हकीकत दावों से जुदा है। हालत ये है कि जौनसार बावर क्षेत्र के 16 जूनियर हाईस्कूलों में सात साल से ताला लटका हुआ है।
इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को कक्षा छह से ऊपर की पढ़ाई के लिए पहाड़ी पगडंडियों और जंगलों के रास्ते छह से सात किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। लंबे समय से अभिभावक इन स्कूलों में शिक्षक तैनाती की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार विभाग के अधिकारी शिक्षकों की कमी बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं।
अभिभावक रामलाल, प्रदीप, रमेश, विजयपाल आदि का कहना है कि हर सत्र में विभाग के अधिकारी शिक्षकों की तैनाती की बात करते है, लेकिन सत्र समाप्त होते ही अपने वादे से मुकर जाते हैं। क्षेत्र में कई ऐसे छात्र हैं जिनकी पढ़ाई घर के पास स्कूल न होने के कारण अधूरी में रह जाती है। कई स्कूलों की दूरी 15-16 किमी की है। ऐसे में गर्मियों में छात्रों को स्कूल जाने के लिए सुबह छह बजे ही घर से निकल जाना पड़ता है। वहीं सर्दियों में घर पहुंचते-पहुंचते अंधेरा हो जाता है।
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जिला शिक्षाधिकारी हेमलता भट्ट ने बताया कि स्थानांतरण एक्ट लागू होते ही बंद पड़े स्कूलों को प्राथमिकता के तौर पर खोलने का काम किया जाएगा।
इन स्कूलों में लटके हैं ताले
शिक्षक तैनाती न होने से जूनियर हाईस्कूल डांगूठा, भगूर, कांडा, भूट, बानपुर, नाईली, बृनाड़, शिरवा, खारसी, कुल्हा, छुमरा, म्यूंडा, डेरसा, साहिया-तपलाड़ समेत 16 स्कूल बंद पड़े हुए हैं।
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त्यूनी।
एक ओर प्रदेश सरकार पहाड़ों पर नौनिहालों को घर के पास ही अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, लेकिन हकीकत दावों से जुदा है। हालत ये है कि जौनसार बावर क्षेत्र के 16 जूनियर हाईस्कूलों में सात साल से ताला लटका हुआ है।
इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को कक्षा छह से ऊपर की पढ़ाई के लिए पहाड़ी पगडंडियों और जंगलों के रास्ते छह से सात किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। लंबे समय से अभिभावक इन स्कूलों में शिक्षक तैनाती की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार विभाग के अधिकारी शिक्षकों की कमी बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं।
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अभिभावक रामलाल, प्रदीप, रमेश, विजयपाल आदि का कहना है कि हर सत्र में विभाग के अधिकारी शिक्षकों की तैनाती की बात करते है, लेकिन सत्र समाप्त होते ही अपने वादे से मुकर जाते हैं। क्षेत्र में कई ऐसे छात्र हैं जिनकी पढ़ाई घर के पास स्कूल न होने के कारण अधूरी में रह जाती है। कई स्कूलों की दूरी 15-16 किमी की है। ऐसे में गर्मियों में छात्रों को स्कूल जाने के लिए सुबह छह बजे ही घर से निकल जाना पड़ता है। वहीं सर्दियों में घर पहुंचते-पहुंचते अंधेरा हो जाता है।
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जिला शिक्षाधिकारी हेमलता भट्ट ने बताया कि स्थानांतरण एक्ट लागू होते ही बंद पड़े स्कूलों को प्राथमिकता के तौर पर खोलने का काम किया जाएगा।
इन स्कूलों में लटके हैं ताले
शिक्षक तैनाती न होने से जूनियर हाईस्कूल डांगूठा, भगूर, कांडा, भूट, बानपुर, नाईली, बृनाड़, शिरवा, खारसी, कुल्हा, छुमरा, म्यूंडा, डेरसा, साहिया-तपलाड़ समेत 16 स्कूल बंद पड़े हुए हैं।