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जोशीमठ की महिलाओं ने बुरांश को बनाया स्वरोजगार का जरिया
Updated Sat, 31 Mar 2018 10:48 PM IST
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जोशीमठ। इन दिनों पहाड़ के जंगल जहां बुरांश के फूल से लकदक हैं वहीं जोशीमठ के गणेशपुर गांव की महिलाओं ने इसे स्वरोजगार का जरिया बनाया है। महिलाएं बुरांश का जूस बनाकर प्रतिमाह करीब पांच हजार रुपये की आमदनी अर्जित कर रही हैं।
गणेशपुर गांव की महिलाओं ने बुरांश को अपनी आर्थिकी का जरिया बना लिया है। महिलाएं बुरांश का जूस बनाकर बाजार में 80 से 90 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेच रही हैं। बुरांश का जूस बना रही माहेश्वरी, धर्मा, बसंती, बेलमती और ममता का कहना है कि पांच वर्ष पूर्व उन्होंने महिला समूह का गठन कर बुरांश का जूस बनाने का काम शुरू किया था। तब से यह व्यवसाय बढ़ता जा रहा है। प्रतिमाह करीब पांच हजार रुपये तक आमदनी हो जाती है। जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्था मंडल के वैज्ञानिक डा. विजय भट्ट का कहना है कि बुरांस के पुष्प में औषधीय गुण हैं। इसका जूस हृदय रोग, किडनी, लीवर के अलावा रक्त कोशिकाओं को बढ़ाता है। बुरांश की पत्तियां जैविक खाद बनाने के काम आती हैं।
गणेशपुर गांव की महिलाओं ने बुरांश को अपनी आर्थिकी का जरिया बना लिया है। महिलाएं बुरांश का जूस बनाकर बाजार में 80 से 90 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेच रही हैं। बुरांश का जूस बना रही माहेश्वरी, धर्मा, बसंती, बेलमती और ममता का कहना है कि पांच वर्ष पूर्व उन्होंने महिला समूह का गठन कर बुरांश का जूस बनाने का काम शुरू किया था। तब से यह व्यवसाय बढ़ता जा रहा है। प्रतिमाह करीब पांच हजार रुपये तक आमदनी हो जाती है। जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्था मंडल के वैज्ञानिक डा. विजय भट्ट का कहना है कि बुरांस के पुष्प में औषधीय गुण हैं। इसका जूस हृदय रोग, किडनी, लीवर के अलावा रक्त कोशिकाओं को बढ़ाता है। बुरांश की पत्तियां जैविक खाद बनाने के काम आती हैं।
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