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अतिक्रमण की गिरफ्त में शहीद स्मारक
Updated Sat, 31 Mar 2018 02:39 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/चकराता।
वीर शहीदों की गौरवशाली गाथा को बंया करने वाला शहीद स्मारक इन दिनों बदहाली पर आंसू बहा रहा है। आलम यह है कि छावनी प्रशासन की उदासीनता के चलते छावनी बाजार स्थित शहीद स्मारक पर फड़ लगा कपड़े बेचे जा रहे हैं।
वर्ष 1947 में आजादी के बाद चकराता में छावनी बाजार स्थित शहीद स्मारक की स्थापना की गई। इसमें देश की आजादी के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर शहीदों के नाम लिखे गए हैं, लेकिन आज पालिका प्रशासन की उदासीनता के चलते यह स्मारक अतिक्रमण का शिकार हो गया है। यहां फड़ लगा कपड़े बेच रहे है।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जैन, तीर्थ कुकरेजा, संयम, साकेत आदि का कहना है कि अतिक्रमण से न सिर्फ स्मारक की सुंदरता को ग्रहण लग रहा है बल्कि, यह शहीदों का अपमान भी है। स्मारक के आसपास से अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार छावनी प्रशासन से पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन हर बार इस मांग को अनसुना कर दिया जाता है। तहसीलदार चकराता केएस नेगी ने बताया कि मामले में छावनी परिषद को पत्र लिखा जाएगा। जल्द ही छावनी परिषद के पास अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
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वीर शहीदों की गौरवशाली गाथा को बंया करने वाला शहीद स्मारक इन दिनों बदहाली पर आंसू बहा रहा है। आलम यह है कि छावनी प्रशासन की उदासीनता के चलते छावनी बाजार स्थित शहीद स्मारक पर फड़ लगा कपड़े बेचे जा रहे हैं।
वर्ष 1947 में आजादी के बाद चकराता में छावनी बाजार स्थित शहीद स्मारक की स्थापना की गई। इसमें देश की आजादी के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर शहीदों के नाम लिखे गए हैं, लेकिन आज पालिका प्रशासन की उदासीनता के चलते यह स्मारक अतिक्रमण का शिकार हो गया है। यहां फड़ लगा कपड़े बेच रहे है।
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शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जैन, तीर्थ कुकरेजा, संयम, साकेत आदि का कहना है कि अतिक्रमण से न सिर्फ स्मारक की सुंदरता को ग्रहण लग रहा है बल्कि, यह शहीदों का अपमान भी है। स्मारक के आसपास से अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार छावनी प्रशासन से पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन हर बार इस मांग को अनसुना कर दिया जाता है। तहसीलदार चकराता केएस नेगी ने बताया कि मामले में छावनी परिषद को पत्र लिखा जाएगा। जल्द ही छावनी परिषद के पास अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
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