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13 सालों का इंतजार खत्म, चौरास पुल आवाजाही के लिए तैयार

Sun, 18 Mar 2018 10:32 PM IST
Updated Sun, 18 Mar 2018 10:32 PM IST
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13 सालों का इंतजार खत्म, चौरास पुल आवाजाही के लिए तैयार
श्रीनगर। श्रीनगर-चौरास मोटर पुल पर चलने का सालों का इंतजार खत्म हो गया है। लगभग 13 साल बाद पुल का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। सोमवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पुल का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद विधिवत रुप से यातायात शुरू होगा। फिलहाल दुपहिया वाहन चालकों को पुल का लाभ मिल पाएगा। इसकी वजह चौरास के छोर में लिंक मोटर मार्ग न होना है। इसके निर्माण में अभी वक्त लगेगा।
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चौरास मोटर पुल पर रोज नई-नई बाधाएं आने से लोगों के लिए इस पुल पर चलना सपना बन गया था। वर्ष 2004-05 में तत्कालीन केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री बीसी खंडूड़ी ने गढ़वाल केंद्रीय विवि के चौरास परिसर सहित दर्जनों गांवों को जोड़ने के लिए अलकनंदा नदी पर चौरास मोटर पुल के निर्माण की नीव रखी, लेकिन 25 मार्च 2012 की रात लिंटर डालते वक्त पुल ध्वस्त हो गया। मार्च 2013 में पुल के पुनर्निर्माण को स्वीकृति मिली। काम शुरू हुआ, तो कभी बजट या कभी अन्य कारणों से पुल निर्माण में देरी होती रही। इस वजह से निर्माण की डेड लाइन भी आगे खिसकती रही। अंत में जनवरी 2018 की शुरुआत में पुल के लोकार्पण निर्णय लिया गया, लेकिन 26 दिसंबर को गढ़वाल विवि के छात्र नेताओं की लोनिवि अधिकारियों के साथ मारपीट ने लोकार्पण के इंतजार को और लंबा कर दिया। कर्मचारी हड़ताल पर चले गए और मजदूरों ने काम करना बंद कर दिया। अब जाकर लोनिवि काम पूरा करा पाई है।
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कब क्या हुआ
वर्ष 2004-05- चौरास पुल को मंजूरी मिली
वर्ष 2006- कंक्रीट पुल के डिजायन के लिए टेंडर निकले
वर्ष 2008- अचानक पुल की डिजायन बदलकर कंक्रीट के बजाय स्टील पुल के डिजायन को मंजूरी दी गई।
वर्ष 2008- माधवाटेक कंपनी ने पुल का निर्माण शुरू किया
वर्ष 2010- माधवाटेक काम अधूरा छोड़कर चली गई
2011 - हिलवेज कंपनी को काम सौंपा। एक साल के अंदर कंपनी ने काम छोड़ दिया
2012 - देवभूमि बिल्डर्स को मिला काम
25 मार्च 2012- निर्माण के दौरान पुल धराशायी हुआ। एक जेई सहित 8 लोगों की जान गई।
मार्च 2013 - पुल के पुनर्निर्माण को मिली मंजूरी मिली।
मार्च 2016 - पुल के निर्माण हेतु रिवाइज्ड इस्टीमेट को मिली मंजूरी।
दिसंबर 2017- छात्र नेताओं की ओर से मारपीट करने से कर्मचारी हड़ताल पर गए, जिसके चलते लगभग 15 दिन काम बंद रहा।
मार्च 2018 - पुल का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।
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समय के साथ बढ़ती गई लागत
श्रीनगर। शुरुआती दौर में पुल निर्माण के लिए लगभग 11 करोड़ रुपये मंजूर हुए। वर्ष 2012 में इसकी लागत बढ़कर 16 करोड़ हो गई। मार्च 2013 में पुनर्निर्माण के लिए 19 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति मिली। मार्च 2016 में इसकी लागत रिवाइज स्टीमेट के साथ 36 करोड़ 34 लाख रुपये तक पहुंच गई। ईई लोनिवि निर्माण खंड श्रीनगर सुरेश तोमर का कहना है कि कीर्तिनगर की ओर सड़क बनाने का काम लोनिवि कीर्तिनगर डिवीजन काम कर रही है। सोमवार को मुख्यमंत्री पुल का विधिवत शुभारंभ करेंगे।
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