{"_id":"5a9440744f1c1b805a8bbf35","slug":"15196654905-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुस्तकों से दूर हो रहे युवाओं व छात्रों के लिए संजीवनी है पुस्तक मेला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुस्तकों से दूर हो रहे युवाओं व छात्रों के लिए संजीवनी है पुस्तक मेला
Updated Mon, 26 Feb 2018 10:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। भले ही जमाना इंटरनेट का है, लेकिन फिर भी युवाओं में पुस्तकों का क्रेज कम नहीं हुआ है। इसकी झलक जीआईएंडटीआई मैदान में इन दिनों आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में देखने को मिल रही है। यहां बड़ी संख्या में पहुंच रहे युवा और शोधार्थी अपनी मनपसंद पुस्तकों खरीद रहे है। युवाओं की चाह है कि दोबारा मेले के स्तर को और अधिक बढ़ाया जाए।
24 फरवरी से आयोजित राष्ट्रीय पंचायत पुस्तक मेले में छात्रों, शिक्षकों के अलावा बड़ी संख्या में गृहणियां भी पहुंच रही हैं। यहां पहुंच रहे लोगों ने पुस्तक मेले को एक सराहनीय पहल बताया है। कहना है कि यह मेला छात्रों व युवाओं को पुस्तकों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। शोध छात्रों ने यहां आयोजित हो रहे पुस्तक मेले के स्तर को और अधिक बढ़ाए जाने की बात भी कही है। वहीं शिक्षकों ने भी इसे एक सराहनीय पहल बताया है।
>>>>>>>>>
पुस्तक मेले को लेकर क्या है इनका कहना
>>
श्रीनगर जैसे छोटे शहर में राष्ट्रीय स्तर का पुस्तक मेला सराहनीय पहल है। शोध छात्रों के लिए यह संजीवनी का काम करेगा। इस पुस्तक मेले का स्तर दिल्ली व जयपुर में आयोजित होने वाले पुस्तक मेलों के बराबर किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
रचना ड्योडी व अनिल मीणा, शोध छात्र गढ़वाल विवि।
- आजकल हर कोई इंटरनेट पर पठन सामग्री ढूंढ रहा है। खास तौर पर बच्चे किताबों से दूर हो रहे हैं। ऐसे में यह पुस्तक मेला बच्चों को किताबों की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
रुचि सेमवाल, गृहणी।
-- पाठक वर्ग कम हो रहा है। यह चुनौती पूर्ण समय है। युवा वर्ग किताबों से दूर हो रहा है, लेकिन किताबों का स्थान कोई नहीं ले सकता है। यह पुस्तक मेला युवाओं व छात्रों को किताबों की ओर आकर्षित करेगा।
प्रो. सुरेखा डंगवाल, डीएसडब्ल्यू गढ़वाल विवि।
मेले में बड़े प्रकाशक
श्रीनगर। राष्ट्रीय पंचायत पुस्तक मेले में करीब 70 प्रकाशक अपनी पुस्तकें लाए हैं, जिनमें राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, नई किताब, प्रकाश संस्थान, किताब घर, विनसर, वाणी, अरिहंत, सांइटिफिक एंड एजुकेशनल एड्स आदि प्रमुख प्रकाशक शामिल हैं।
विज्ञापन
24 फरवरी से आयोजित राष्ट्रीय पंचायत पुस्तक मेले में छात्रों, शिक्षकों के अलावा बड़ी संख्या में गृहणियां भी पहुंच रही हैं। यहां पहुंच रहे लोगों ने पुस्तक मेले को एक सराहनीय पहल बताया है। कहना है कि यह मेला छात्रों व युवाओं को पुस्तकों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। शोध छात्रों ने यहां आयोजित हो रहे पुस्तक मेले के स्तर को और अधिक बढ़ाए जाने की बात भी कही है। वहीं शिक्षकों ने भी इसे एक सराहनीय पहल बताया है।
विज्ञापन
>>>>>>>>>
पुस्तक मेले को लेकर क्या है इनका कहना
>>
श्रीनगर जैसे छोटे शहर में राष्ट्रीय स्तर का पुस्तक मेला सराहनीय पहल है। शोध छात्रों के लिए यह संजीवनी का काम करेगा। इस पुस्तक मेले का स्तर दिल्ली व जयपुर में आयोजित होने वाले पुस्तक मेलों के बराबर किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
रचना ड्योडी व अनिल मीणा, शोध छात्र गढ़वाल विवि।
- आजकल हर कोई इंटरनेट पर पठन सामग्री ढूंढ रहा है। खास तौर पर बच्चे किताबों से दूर हो रहे हैं। ऐसे में यह पुस्तक मेला बच्चों को किताबों की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
रुचि सेमवाल, गृहणी।
-- पाठक वर्ग कम हो रहा है। यह चुनौती पूर्ण समय है। युवा वर्ग किताबों से दूर हो रहा है, लेकिन किताबों का स्थान कोई नहीं ले सकता है। यह पुस्तक मेला युवाओं व छात्रों को किताबों की ओर आकर्षित करेगा।
प्रो. सुरेखा डंगवाल, डीएसडब्ल्यू गढ़वाल विवि।
मेले में बड़े प्रकाशक
श्रीनगर। राष्ट्रीय पंचायत पुस्तक मेले में करीब 70 प्रकाशक अपनी पुस्तकें लाए हैं, जिनमें राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, नई किताब, प्रकाश संस्थान, किताब घर, विनसर, वाणी, अरिहंत, सांइटिफिक एंड एजुकेशनल एड्स आदि प्रमुख प्रकाशक शामिल हैं।