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राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में जुटेंगे विभिन्न विषयों के शोधार्थी व विद्वान
Updated Tue, 30 Jan 2018 10:12 PM IST
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देवप्रयाग। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर देवप्रयाग में पहली फरवरी से विभिन्न विषयों और धर्म ग्रंथों पर संगोष्ठियों का आयोजन होगा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की गोष्ठियों में देश के विभिन्न राज्यों के प्राध्यापकों के अलावा विदेश से भी विषय विशेषज्ञ प्रतिभाग कर रहे है।
संस्थान के प्राचार्य प्रो. केबी सुब्बरायुडु ने बताया कि एक और दो फरवरी को वेद विभाग और तीन फरवरी को व्याकरण विभाग की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। चार और पांच फरवरी को साहित्य विभाग की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। इसका विषय है ‘बौद्ध मिश्रित संस्कृत साहित्य का वैश्विक संदेश’। 6-7 फरवरी को ज्योतिष विभाग की संगोष्ठी होगी। 8-9 फरवरी को होने वाले आधुनिक विभाग (हिंदी, इतिहास, अंग्रेजी, कंप्यूटर इत्यादि) के सेमिनार का विषय ‘भारतीय समाज का प्रतिबिंबन: ऐतिहासिक और साहित्यिक संदर्भ में’ रखा गया है। प्राचार्य ने बताया कि 9-10 फरवरी को आयोजित होने वाली वेदांत की संगोष्ठी में ‘वर्तमान युग में वेदांत का महत्व’ विषय पर चर्चा की जाएगी। कहा कि संस्थान में संगोष्ठियों के आयोजन से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को लाभ मिलेगा। संगोष्ठियों के संयोजक प्रो. बनमाली बिश्वाल ने बताया कि संगोष्ठियों के आयोजन का उद्देश्य शास्त्रीय ज्ञान से आम जन के साथ ही नई पीढ़ी को रू-ब-रू कराना है।
संस्थान के प्राचार्य प्रो. केबी सुब्बरायुडु ने बताया कि एक और दो फरवरी को वेद विभाग और तीन फरवरी को व्याकरण विभाग की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। चार और पांच फरवरी को साहित्य विभाग की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। इसका विषय है ‘बौद्ध मिश्रित संस्कृत साहित्य का वैश्विक संदेश’। 6-7 फरवरी को ज्योतिष विभाग की संगोष्ठी होगी। 8-9 फरवरी को होने वाले आधुनिक विभाग (हिंदी, इतिहास, अंग्रेजी, कंप्यूटर इत्यादि) के सेमिनार का विषय ‘भारतीय समाज का प्रतिबिंबन: ऐतिहासिक और साहित्यिक संदर्भ में’ रखा गया है। प्राचार्य ने बताया कि 9-10 फरवरी को आयोजित होने वाली वेदांत की संगोष्ठी में ‘वर्तमान युग में वेदांत का महत्व’ विषय पर चर्चा की जाएगी। कहा कि संस्थान में संगोष्ठियों के आयोजन से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को लाभ मिलेगा। संगोष्ठियों के संयोजक प्रो. बनमाली बिश्वाल ने बताया कि संगोष्ठियों के आयोजन का उद्देश्य शास्त्रीय ज्ञान से आम जन के साथ ही नई पीढ़ी को रू-ब-रू कराना है।
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