{"_id":"5a6df7034f1c1bb2208b5d1a","slug":"15171563004-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कार्यमुक्त होने के बाद जेआर को अस्पताल परिसर में धरना देने की कोशिश विफल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कार्यमुक्त होने के बाद जेआर को अस्पताल परिसर में धरना देने की कोशिश विफल
Updated Sun, 28 Jan 2018 09:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कालेज से रिलीव होने के बाद भी आंदोलनरत 74 जूनियर डाक्टर (जेआर) रविवार को बेस अस्पताल परिसर में डटे रहे। उन्होंने अस्पताल परिसर में धरने के लिए तंबू लगाया, लेकिन बिना अनुमति धरना देने पर पुलिस ने तंबू हटा दिया। जेआर ने कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज से भी मुलाकात की। इधर, कालेज प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सभी जूनियर डाक्टर अब पीएमएचएस (प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा) के कर्मचारी हैं, लिहाजा उनको वहीं ज्वाइनिंग देनी चाहिए।
इंटर्न को चार माह से मानदेय न मिलने, जूनियर रेजीडेंट (जेआर) की वेतन विसंगति दूर न होने और अवैध रुप से विद्युत उपकरण प्रयोग करने पर कालेज प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई से नाराज मेडिकल कालेज के जूनियर रेजीडेंट और प्रशिक्षु डॉक्टरों ने 24 जनवरी से ओपीडी (वाह्य कालीन रोगी विभाग) का बहिष्कार कर दिया था। 25 जनवरी की शाम उनकी कालेज के प्राचार्य प्रो. सीएमएस रावत से वार्ता हुई, लेकिन बात नहीं बनी। 27 जनवरी को कालेज खुलने पर उनकी पुन: प्राचार्य प्रो. रावत और वित्त नियंत्रक विवेक स्वरूप से वार्ता हुई। वार्ता में सहमति बनने पर कालेज प्रशासन की ओर से संबंधित आदेश भी निर्गत कर दिए गए, लेकिन देर शाम उक्त डॉक्टर पुन: कालेज पहुंच गए। उन्होंने फिर हल्द्वानी मेडिकल कालेज के समान जेआर को वेतन देने की मांग की। कालेज प्रशासन की ओर से उन्हें बताया गया कि उनका वेतन निर्धारण सही है और उनको शासनादेश के अनुरूप वेतन मिल रहा है, लेकिन जूनियर डाक्टर अपनी मांग पर अड़े रहे।
जूनियर डाक्टरों के अड़ियल रवैये को देखते हुए कालेज प्रशासन ने उनको पीएमएचएस में जाने का सुझाव दिया। उनकी हामी मिलते ही जेआर को रिलीव कर दिया गया। इसके अलावा उनको एक हफ्ते के अंदर हॉस्टल भी खाली करने को कह दिया गया, लेकिन जेआर रविवार को फिर बेस अस्पताल में आ गए और उन्होंने ओपीडी के समक्ष तंबू गाड़ दिया। प्राचार्य ने पुलिस से कार्रवाई करने को कहा। मौके पर पहुंची पुलिस ने उनका तंबू हटा दिया। अपराह्न में जेआर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से मिले। महाराज ने इस मसले पर मुख्यमंत्री से वार्ता करनी चाही, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। बाद में एसडीएम मायादत्त जोशी ने जेआर को आश्वस्त किया कि प्राचार्य के समक्ष उनकी बातों को सुना जाएगा।
विज्ञापन
कोट----------
जूनियर डाक्टरों की सभी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक कार्रवाई की गई, लेकिन वह कार्य में गतिरोध करते हुए हड़ताल पर रहने की धमकी दे रहे थे। इसका कोई औचित्य नहीं था, इसलिए उनको तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया।
-प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर।
इंटर्न को चार माह से मानदेय न मिलने, जूनियर रेजीडेंट (जेआर) की वेतन विसंगति दूर न होने और अवैध रुप से विद्युत उपकरण प्रयोग करने पर कालेज प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई से नाराज मेडिकल कालेज के जूनियर रेजीडेंट और प्रशिक्षु डॉक्टरों ने 24 जनवरी से ओपीडी (वाह्य कालीन रोगी विभाग) का बहिष्कार कर दिया था। 25 जनवरी की शाम उनकी कालेज के प्राचार्य प्रो. सीएमएस रावत से वार्ता हुई, लेकिन बात नहीं बनी। 27 जनवरी को कालेज खुलने पर उनकी पुन: प्राचार्य प्रो. रावत और वित्त नियंत्रक विवेक स्वरूप से वार्ता हुई। वार्ता में सहमति बनने पर कालेज प्रशासन की ओर से संबंधित आदेश भी निर्गत कर दिए गए, लेकिन देर शाम उक्त डॉक्टर पुन: कालेज पहुंच गए। उन्होंने फिर हल्द्वानी मेडिकल कालेज के समान जेआर को वेतन देने की मांग की। कालेज प्रशासन की ओर से उन्हें बताया गया कि उनका वेतन निर्धारण सही है और उनको शासनादेश के अनुरूप वेतन मिल रहा है, लेकिन जूनियर डाक्टर अपनी मांग पर अड़े रहे।
विज्ञापन
जूनियर डाक्टरों के अड़ियल रवैये को देखते हुए कालेज प्रशासन ने उनको पीएमएचएस में जाने का सुझाव दिया। उनकी हामी मिलते ही जेआर को रिलीव कर दिया गया। इसके अलावा उनको एक हफ्ते के अंदर हॉस्टल भी खाली करने को कह दिया गया, लेकिन जेआर रविवार को फिर बेस अस्पताल में आ गए और उन्होंने ओपीडी के समक्ष तंबू गाड़ दिया। प्राचार्य ने पुलिस से कार्रवाई करने को कहा। मौके पर पहुंची पुलिस ने उनका तंबू हटा दिया। अपराह्न में जेआर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से मिले। महाराज ने इस मसले पर मुख्यमंत्री से वार्ता करनी चाही, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। बाद में एसडीएम मायादत्त जोशी ने जेआर को आश्वस्त किया कि प्राचार्य के समक्ष उनकी बातों को सुना जाएगा।
विज्ञापन
कोट----------
जूनियर डाक्टरों की सभी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक कार्रवाई की गई, लेकिन वह कार्य में गतिरोध करते हुए हड़ताल पर रहने की धमकी दे रहे थे। इसका कोई औचित्य नहीं था, इसलिए उनको तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया।
-प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर।