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चमोली के सुदूर गांवों में आजीविका का साधन बनेगी रैनवो ट्राउट मछली
Updated Tue, 23 Jan 2018 10:16 PM IST
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गोपेश्वर। चमोली जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बसे गांवों के ग्रामीण अब परंपरागत खेती के साथ ही रैनबो ट्राउट मछली का उत्पादन कर स्वरोजगार भी कर सकेंगे। जिले के मत्स्य विभाग ने ग्रामीणों के लिए एक बेहतर योजना बनाई है, जिसके तहत ग्रामीण स्वयं एक समिति का गठन करेंगे और विभाग की ओर से उन्हें तालाब बनाने के लिए धनराशि और मछली के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बाद समिति के माध्यम से ही मत्स्य पालन होगा। योजना कारगर हुई तो ग्रामीण खेती के साथ ही मत्स्य पालन से अच्छी आमदनी जुटा सकेंगे।
अभी तक मत्स्य विभाग की ओर से काश्तकारों को मत्स्य पालन के लिए तालाब बनाने को वित्तीय मदद दी जाती थी। पहले साल काश्तकार को मछली के बीज भी मुफ्त में दिए गए। पहले साल तो काश्तकारों ने मत्स्य पालन में उत्साह दिखाया लेकिन दूसरे साल कोई वित्तीय मदद न मिलने के कारण काश्तकारों ने तालाबों को अपने हाल पर छोड़ दिया। काश्तकारों की इसी उदासीनता को देखते हुए अब मत्स्य विभाग ने ग्रामीणों को समिति के माध्यम से तालाब निर्माण के लिए धनराशि देने का निर्णय लिया है। इसके तहत एक यूनिट को 80 हजार रुपये और रैनबो ट्राउट मछली के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। मत्स्य विभाग समिति को तकनीकी सहयोग देगा। मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक जीएस बिष्ट का कहना है कि जिले के सुतोल, देवाल और ल्वाणी में योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। मत्स्य पालन से ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन भी रुकेगा और रोजगार भी बढ़ेगा।
अमेरिका की है रैनबो ट्राउट मछली
रैनबो ट्राउट मछली मूल रूप से अमेरिका की है। यह समुद्रतल से 1200 मीटर से अधिक ऊंचाई के हिमनदी से आपूर्ति होने वाले जलधाराओं में पाई जाती है। यह प्रजाति विश्व स्तरीय स्पोर्ट फिश है। यह 52 सेंटीमीटर लंबी और 4.5 किलोग्राम वजन तक होती है। भोजन की दृष्टि से यह स्वादिष्ट मछलियों में से एक है।
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जिले में बनाए दो मत्स्य तालाब
सामान्यत: मत्स्य तालाब 50 वर्ग मीटर के होते हैं, लेकिन जिले में पोखरी और देवाल में दो आदर्श मत्स्य तालाब का निर्माण किया गया है। आगामी मार्च माह में यहां ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प और कॉमन कार्प मछली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। पोखरी बंगथल गांव में जन्मेजय भट्ट और देवाल के रुईसाण गांव में मंगलावती देवी आदर्श तालाबों में मछली उत्पादन करेंगी। आदर्श तालाब बनाने से विभाग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक ग्रामीण भी मत्स्य पालन से स्वरोजगार कर सकते हैं।
अभी तक मत्स्य विभाग की ओर से काश्तकारों को मत्स्य पालन के लिए तालाब बनाने को वित्तीय मदद दी जाती थी। पहले साल काश्तकार को मछली के बीज भी मुफ्त में दिए गए। पहले साल तो काश्तकारों ने मत्स्य पालन में उत्साह दिखाया लेकिन दूसरे साल कोई वित्तीय मदद न मिलने के कारण काश्तकारों ने तालाबों को अपने हाल पर छोड़ दिया। काश्तकारों की इसी उदासीनता को देखते हुए अब मत्स्य विभाग ने ग्रामीणों को समिति के माध्यम से तालाब निर्माण के लिए धनराशि देने का निर्णय लिया है। इसके तहत एक यूनिट को 80 हजार रुपये और रैनबो ट्राउट मछली के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। मत्स्य विभाग समिति को तकनीकी सहयोग देगा। मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक जीएस बिष्ट का कहना है कि जिले के सुतोल, देवाल और ल्वाणी में योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। मत्स्य पालन से ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन भी रुकेगा और रोजगार भी बढ़ेगा।
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अमेरिका की है रैनबो ट्राउट मछली
रैनबो ट्राउट मछली मूल रूप से अमेरिका की है। यह समुद्रतल से 1200 मीटर से अधिक ऊंचाई के हिमनदी से आपूर्ति होने वाले जलधाराओं में पाई जाती है। यह प्रजाति विश्व स्तरीय स्पोर्ट फिश है। यह 52 सेंटीमीटर लंबी और 4.5 किलोग्राम वजन तक होती है। भोजन की दृष्टि से यह स्वादिष्ट मछलियों में से एक है।
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जिले में बनाए दो मत्स्य तालाब
सामान्यत: मत्स्य तालाब 50 वर्ग मीटर के होते हैं, लेकिन जिले में पोखरी और देवाल में दो आदर्श मत्स्य तालाब का निर्माण किया गया है। आगामी मार्च माह में यहां ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प और कॉमन कार्प मछली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। पोखरी बंगथल गांव में जन्मेजय भट्ट और देवाल के रुईसाण गांव में मंगलावती देवी आदर्श तालाबों में मछली उत्पादन करेंगी। आदर्श तालाब बनाने से विभाग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक ग्रामीण भी मत्स्य पालन से स्वरोजगार कर सकते हैं।