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ठंडे बस्ते में गई सोलर सिटी बनाने की महायोजना
Updated Thu, 14 Dec 2017 10:49 PM IST
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गोपेश्वर। गुजरात की तर्ज पर पर्यटन नगरी गोपेश्वर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की महायोजना ठंडे बस्ते में चले गई है। महायोजना में 65 फीसदी लाभांश नगर पालिका को और 35 फीसदी लाभांश केंद्र सरकार को खर्च करना था लेकिन नगर पालिका चमोली ने महायोजना के लिए लाभांश देने से इंकार कर दिया है। अगर यह महायोजना बन जाती तो लोगों को बिजली मुफ्त में ही मिलती।
वर्ष 2010 के सितंबर माह में सोलर सिटी का मास्टर प्लान तैयार हुआ था। तत्कालीन वैकल्पिक ऊर्जा मंत्री राजेंद्र भंडारी की अध्यक्षता में सोलर सिटी के स्वरूप को लेकर समाज सेवियों और प्रबुद्धजनों के साथ बैठक भी हुई थी। महायोजना को क्रियान्वित करने के लिए दिल्ली की इंटरनेशनल काउंसलिंग फॉर लोकल इनवायरमेंट संस्था को अधिकृत किया गया था। सोलर सिटी के नाम पर केंद्र सरकार ने करीब पांच लाख रुपये मास्टर प्लान बनाने के लिए खर्च कर दिए थे, लेकिन इस महायोजना को धरातल पर उतारने के लिए जब केंद्र सरकार के वैकल्पिक ऊर्जा मंत्रालय से नगर पालिका को 65 फीसदी लाभांश जमा करने के लिए कहा गया तो, पालिका ने लाभांश जमा करने से इनकार कर लिया। पालिकाध्यक्ष संदीप रावत का कहना है कि पूर्व में सोलर सिटी की स्थापना के लिए केंद्र की ओर से 80 फीसदी और पालिका की ओर से बीस फीसदी लाभांश दिए जाने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब इस समझौते को पलटकर वैकल्पिक ऊर्जा मंत्रालय की ओर से पालिका को 65 फीसदी लाभांश खर्च करने के लिए कहा जा रहा है। पालिका के पास सोलर सिटी के लिए इतनी धनराशि नहीं है। नगर के सुंदरीकरण और पथ प्रकाश पर पालिका पूरा ध्यान दे रही है।
प्रतिदिन 3 मेगावाट बिजली की होती बचत
गोपेश्वर। नगर पालिका गोपेश्वर की जनसंख्या बीस हजार से भी अधिक है। सर्दियों में गोपेश्वरवासी प्रतिदिन तकरीबन तीन मेगावाट बिजली खर्च करे हैं, जबकि गर्मियों में दो मेगावाट। यहां वर्तमान में चार बिजली परियोजनाएं हैं, जिनसे करीब 43.4 मेगावाट बिजली उत्पादित होती है। ऊर्जा निगम अतिरिक्त बिजली को ग्रीड पर सप्लाई कर देता है। यदि गोपेश्वर सोलर सिटी के रूप में विकसित होती, तो यहां खपत होने वाली तीन मेगावाट बिजली की बचत होगी।
वर्ष 2010 के सितंबर माह में सोलर सिटी का मास्टर प्लान तैयार हुआ था। तत्कालीन वैकल्पिक ऊर्जा मंत्री राजेंद्र भंडारी की अध्यक्षता में सोलर सिटी के स्वरूप को लेकर समाज सेवियों और प्रबुद्धजनों के साथ बैठक भी हुई थी। महायोजना को क्रियान्वित करने के लिए दिल्ली की इंटरनेशनल काउंसलिंग फॉर लोकल इनवायरमेंट संस्था को अधिकृत किया गया था। सोलर सिटी के नाम पर केंद्र सरकार ने करीब पांच लाख रुपये मास्टर प्लान बनाने के लिए खर्च कर दिए थे, लेकिन इस महायोजना को धरातल पर उतारने के लिए जब केंद्र सरकार के वैकल्पिक ऊर्जा मंत्रालय से नगर पालिका को 65 फीसदी लाभांश जमा करने के लिए कहा गया तो, पालिका ने लाभांश जमा करने से इनकार कर लिया। पालिकाध्यक्ष संदीप रावत का कहना है कि पूर्व में सोलर सिटी की स्थापना के लिए केंद्र की ओर से 80 फीसदी और पालिका की ओर से बीस फीसदी लाभांश दिए जाने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब इस समझौते को पलटकर वैकल्पिक ऊर्जा मंत्रालय की ओर से पालिका को 65 फीसदी लाभांश खर्च करने के लिए कहा जा रहा है। पालिका के पास सोलर सिटी के लिए इतनी धनराशि नहीं है। नगर के सुंदरीकरण और पथ प्रकाश पर पालिका पूरा ध्यान दे रही है।
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प्रतिदिन 3 मेगावाट बिजली की होती बचत
गोपेश्वर। नगर पालिका गोपेश्वर की जनसंख्या बीस हजार से भी अधिक है। सर्दियों में गोपेश्वरवासी प्रतिदिन तकरीबन तीन मेगावाट बिजली खर्च करे हैं, जबकि गर्मियों में दो मेगावाट। यहां वर्तमान में चार बिजली परियोजनाएं हैं, जिनसे करीब 43.4 मेगावाट बिजली उत्पादित होती है। ऊर्जा निगम अतिरिक्त बिजली को ग्रीड पर सप्लाई कर देता है। यदि गोपेश्वर सोलर सिटी के रूप में विकसित होती, तो यहां खपत होने वाली तीन मेगावाट बिजली की बचत होगी।
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