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श्रद्धालुओं ने की मां उमा देवी की पूजा अर्चनाएं
Updated Sun, 10 Dec 2017 10:02 PM IST
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कर्णप्रयाग। डिम्मर गांव के ग्रामीणों ने मां उमा देवी को गहथ की दाल और भात (चावल) का भोग लगाया गया। गांव के समीप आली गदेरे में स्थित मां उमा देवी के पौराणिक मंदिर में ब्रह्मबेला से पंडित गणेश चंद्र खंडूड़ी और ग्रामीणों ने मां उमा की दुर्गा सप्तशती और अन्य वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ पूजा की। दोपहर को मंदिर प्रांगण में बनाई गई गहथ की दाल और भात का भोग मां उमा को लगाया। इसके बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं को यह प्रसाद के रूप में बांटा गया।
रविवार की शाम को आचार्यों की ओर से आली गदेरे से मां उमा की पवित्र चौकी और दीपक को खल्दार तोक से गांव के एतिहासिक चौरीं चौक तक मंत्रोच्चारों के साथ ले जाया गया। जहां पर देवताओं के पश्वाओं ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष सुरेश कुमार डिमरी ने बताया कि पौराणिक काल से मां उमा को भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने से पूर्व बाड़ी-भात और कपाट बंद होने के बाद गहथ-भात के रूप में नए अनाज का भोग लगाकर सुख-समृद्धि की कामनाएं की जाती हैं। इस मौके पर सत्य प्रसाद खंडूड़ी, हरीश डिमरी, आशुतोष डिमरी, अशोक डिमरी, शैलेंद्र प्रसाद, अनिल कुमार, बुद्धिबल्लभ डिमरी, मोहन प्रसाद, महेश चंद्र सहित डिम्मर, नाकोट, सैंण, भभराड़ी, मज्याड़ी, राड़खी, माखोली, कर्णप्रयाग आदि स्थानों से पहुंचे सैकड़ों भक्तों ने मां उमा के दर्शन कर मनौती मांगी।
रविवार की शाम को आचार्यों की ओर से आली गदेरे से मां उमा की पवित्र चौकी और दीपक को खल्दार तोक से गांव के एतिहासिक चौरीं चौक तक मंत्रोच्चारों के साथ ले जाया गया। जहां पर देवताओं के पश्वाओं ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष सुरेश कुमार डिमरी ने बताया कि पौराणिक काल से मां उमा को भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने से पूर्व बाड़ी-भात और कपाट बंद होने के बाद गहथ-भात के रूप में नए अनाज का भोग लगाकर सुख-समृद्धि की कामनाएं की जाती हैं। इस मौके पर सत्य प्रसाद खंडूड़ी, हरीश डिमरी, आशुतोष डिमरी, अशोक डिमरी, शैलेंद्र प्रसाद, अनिल कुमार, बुद्धिबल्लभ डिमरी, मोहन प्रसाद, महेश चंद्र सहित डिम्मर, नाकोट, सैंण, भभराड़ी, मज्याड़ी, राड़खी, माखोली, कर्णप्रयाग आदि स्थानों से पहुंचे सैकड़ों भक्तों ने मां उमा के दर्शन कर मनौती मांगी।
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