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दूसरों को कष्ट देने वाला बनता है दु:ख का भागी
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:58 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
भागवत ज्ञान के मर्मज्ञ महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वजी महाराज ने कहा है कि जन्म और मृत्यु परमात्मा का विधान है, लेकिन जब कोई मानव दूसरे की जीवन लीला समाप्त करने की योजना बनाता है तो उसकी जीवन लीला परमात्मा समाप्त कर देते हैं। दूसरों को कष्ट देने वाला दु:ख का भागी बनता है तथा मां-बहनों को कुभाव से देखने वाला राक्षस होता है, वे आज राजा गार्डन स्थित हनुमान मंदिर के सत्संग हाल में भागवत ज्ञान की अमृत गंगा का प्रवाह कर रहे थे।
नंदोत्सव की कथा का वर्णन करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि जब समाज में किसी सत्पुरुष का आगमन होता है तो प्रकृति में हर्ष का वातावरण बन जाता है। नंद बाबा ने छप्पन भोग से लाला की खुशियां मनाई। नंदोत्सव की गूंज मथुरा तक पहुंची तो कंस ने पूतना को भेजकर कृष्ण को मारने की साजिश रची। पूतना ने अपने स्तनों में जहर लगाकर कृष्ण को मारना चाहा लेकिन भगवान ने दूध के साथ ही पूतना के प्राण पी लिए। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने श्रीमद् भागवत के साथ ही सूरदास और रसखान की उन रचनाओं का वर्णन किया जिससे समाज में प्रसन्नता एवं समरसता का वातावरण बनाने की प्रेरणा मिलती है। योगाचार्य शिवओम ने कबीरदास की तरह शरीर रूपी चादर को पवित्र रखने की बात कही तो आचार्य डा. नारायण शास्त्री ने अष्टावक्र गीता एवं गंगा की महिमा पर व्याख्यान दिया। कथा यजमान नरेश शर्मा, दिनेश चंद शास्त्री, आचार्य प्रकाश चंद पंत, रविंद्र मिश्रा आदि रहे।
हरिद्वार।
भागवत ज्ञान के मर्मज्ञ महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वजी महाराज ने कहा है कि जन्म और मृत्यु परमात्मा का विधान है, लेकिन जब कोई मानव दूसरे की जीवन लीला समाप्त करने की योजना बनाता है तो उसकी जीवन लीला परमात्मा समाप्त कर देते हैं। दूसरों को कष्ट देने वाला दु:ख का भागी बनता है तथा मां-बहनों को कुभाव से देखने वाला राक्षस होता है, वे आज राजा गार्डन स्थित हनुमान मंदिर के सत्संग हाल में भागवत ज्ञान की अमृत गंगा का प्रवाह कर रहे थे।
नंदोत्सव की कथा का वर्णन करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि जब समाज में किसी सत्पुरुष का आगमन होता है तो प्रकृति में हर्ष का वातावरण बन जाता है। नंद बाबा ने छप्पन भोग से लाला की खुशियां मनाई। नंदोत्सव की गूंज मथुरा तक पहुंची तो कंस ने पूतना को भेजकर कृष्ण को मारने की साजिश रची। पूतना ने अपने स्तनों में जहर लगाकर कृष्ण को मारना चाहा लेकिन भगवान ने दूध के साथ ही पूतना के प्राण पी लिए। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने श्रीमद् भागवत के साथ ही सूरदास और रसखान की उन रचनाओं का वर्णन किया जिससे समाज में प्रसन्नता एवं समरसता का वातावरण बनाने की प्रेरणा मिलती है। योगाचार्य शिवओम ने कबीरदास की तरह शरीर रूपी चादर को पवित्र रखने की बात कही तो आचार्य डा. नारायण शास्त्री ने अष्टावक्र गीता एवं गंगा की महिमा पर व्याख्यान दिया। कथा यजमान नरेश शर्मा, दिनेश चंद शास्त्री, आचार्य प्रकाश चंद पंत, रविंद्र मिश्रा आदि रहे।
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