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चौपता चौरीं कौथिग में उमड़ी श्रद्वालुओं की भारी भीड़
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:34 PM IST
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नारायणबगड़। श्री सिद्धपीठ राजराजेश्वरी गिरिजा भवानी चौपता चौरीं कौथिग के नवें दिन देवी के ऐंद्री स्वरूप की वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ पूजा की गई। इस दौरान बुडेरा और भूूमियाल देवता के बीच युद्ध हुआ। बुडेरा देवता युद्ध और भूमियाल देवता की घोड़े की सवारी आकर्षण का केंद्र रही।
सोमवार को चौपता चौरीं कौथिग के नवमी पर्व पर आयोजकों ने माता राजराजेश्वरी की हाथी पर सवार होकर एंद्री स्वरूप की भव्य झांकी निकाली। इस दौरान देवी देवताओं के पश्वाओं ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इसके बाद बुडेरा राजा की सेना और देवताओं के पश्वाओं के बीच युद्ध हुआ। भूमियाल देवता के पश्वा ने घोड़े कर बैठकर युद्ध के बाद नृत्य किया। पंडित रमेश प्रसाद सती और भास्करानंद सती ने बताया कि पुराणों में वर्णन है कि जब महिसासुर का आतंक तीनों लोकों में बढ़ गया था तो देवी देवताओं ने आदिशक्ति की आराधना की। तब देवताओं के राजा इंद्र के ऐरावत हाथी पर सवार होकर माता भगवती ने एंद्री स्वरूप धारण किया था। इसलिए यहां आयोजित कौथिग में माता आदिशक्ति के एंद्री स्वरूप की पूजा की जाती है। यहां आयोजित मेले में खरीदारी के लिए दुकानों में भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने चर्खी और झूलों का भरपूर आनंद लिया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह सिनवाल, दलवीर सिंह रावत, सरोप सिंह, जगमोहन सिंह, सुरजीत सिंह, लक्ष्मण, मुकेश रावत सहित दूर दराज के सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे।
सोमवार को चौपता चौरीं कौथिग के नवमी पर्व पर आयोजकों ने माता राजराजेश्वरी की हाथी पर सवार होकर एंद्री स्वरूप की भव्य झांकी निकाली। इस दौरान देवी देवताओं के पश्वाओं ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इसके बाद बुडेरा राजा की सेना और देवताओं के पश्वाओं के बीच युद्ध हुआ। भूमियाल देवता के पश्वा ने घोड़े कर बैठकर युद्ध के बाद नृत्य किया। पंडित रमेश प्रसाद सती और भास्करानंद सती ने बताया कि पुराणों में वर्णन है कि जब महिसासुर का आतंक तीनों लोकों में बढ़ गया था तो देवी देवताओं ने आदिशक्ति की आराधना की। तब देवताओं के राजा इंद्र के ऐरावत हाथी पर सवार होकर माता भगवती ने एंद्री स्वरूप धारण किया था। इसलिए यहां आयोजित कौथिग में माता आदिशक्ति के एंद्री स्वरूप की पूजा की जाती है। यहां आयोजित मेले में खरीदारी के लिए दुकानों में भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने चर्खी और झूलों का भरपूर आनंद लिया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह सिनवाल, दलवीर सिंह रावत, सरोप सिंह, जगमोहन सिंह, सुरजीत सिंह, लक्ष्मण, मुकेश रावत सहित दूर दराज के सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे।
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