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चार साल बाद भी देवाल क्षेत्र में हरे हैं आपदा के जख्म
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:34 PM IST
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गोपेश्वर। साल 2013 की आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए पैदल रास्तों तक का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। लिंगड़ी क्षेत्र की करीब पांच हजार की आबादी आज भी पिंडर नदी पर बने लकड़ी के अस्थायी पुल से आवाजाही कर रही है। इस पुल को ग्रामीणों ने खुुद बनाया है लेकिन पुल के दोनों ओर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होने से यहां हर वक्त खतरा बना रहता है।
आपदा के दौरान पिंडर नदी पर बने चार झूला पुल बह गए थे। तब लोनिवि की ओर से आवाजाही के लिए कई जगहों पर लकड़ी के अस्थायी पुल बनाए गए थे। पिंडर नदी पर बोरागाड मंदिर के नीचे लिंगड़ी, ओडर, बजीर, सिमगढी, मोफटा, थली-पातल, भगदानू, जखेड़ा और दाबों गांवों के ग्रामीणों की आवाजाही के लिए भी लकड़ी का पुल बनाया गया था, लेकिन वर्ष 2015 में पुल जलस्तर बढ़ने से बह गया था। तब ग्रामीणों ने आवाजाही के लिए स्वयं के संसाधनों से लकड़ी का अस्थायी पुल बनाया था, लेकिन इस पुल के दोनों ओर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। लिंगड़ी गांव के प्रधान खिलाप सिंह का कहना है कि इस पुल से जीआईसी बौरागाड़ और प्राथमिक विद्यालय लिंगड़ी में पढ़ने वाले बच्चे रोज गुजरते हैं। ग्रामीणों को स्वास्थ्य केंद्र तक जाने के लिए भी इसी पुल से आवाजाही करनी पड़ती है। वर्ष 2015 में बोरागाड में विश्व बैंक की मदद से पुल निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन निर्माण कार्य धीमी गति से हो रहा है। साथ ही पुल निर्माण की गुणवत्ता भी अच्छी नहीं है। सतीश डिमरी का कहना है कि ग्रामीण कई बार पिंडर नदी पर अस्थायी पुल निर्माण की मांग जिला प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों की कोई सुनने वाला नहीं है। इधर, लोनिवि (विश्व बैंक) के ईई राजेंद्र चौहान का कहना है कि आगामी वर्ष मई माह तक बोरागाड़ में झूला पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। पुल के निर्माण में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। अभियंताओं की ओर से लगातार निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया जा रहा है।
आपदा के दौरान पिंडर नदी पर बने चार झूला पुल बह गए थे। तब लोनिवि की ओर से आवाजाही के लिए कई जगहों पर लकड़ी के अस्थायी पुल बनाए गए थे। पिंडर नदी पर बोरागाड मंदिर के नीचे लिंगड़ी, ओडर, बजीर, सिमगढी, मोफटा, थली-पातल, भगदानू, जखेड़ा और दाबों गांवों के ग्रामीणों की आवाजाही के लिए भी लकड़ी का पुल बनाया गया था, लेकिन वर्ष 2015 में पुल जलस्तर बढ़ने से बह गया था। तब ग्रामीणों ने आवाजाही के लिए स्वयं के संसाधनों से लकड़ी का अस्थायी पुल बनाया था, लेकिन इस पुल के दोनों ओर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। लिंगड़ी गांव के प्रधान खिलाप सिंह का कहना है कि इस पुल से जीआईसी बौरागाड़ और प्राथमिक विद्यालय लिंगड़ी में पढ़ने वाले बच्चे रोज गुजरते हैं। ग्रामीणों को स्वास्थ्य केंद्र तक जाने के लिए भी इसी पुल से आवाजाही करनी पड़ती है। वर्ष 2015 में बोरागाड में विश्व बैंक की मदद से पुल निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन निर्माण कार्य धीमी गति से हो रहा है। साथ ही पुल निर्माण की गुणवत्ता भी अच्छी नहीं है। सतीश डिमरी का कहना है कि ग्रामीण कई बार पिंडर नदी पर अस्थायी पुल निर्माण की मांग जिला प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों की कोई सुनने वाला नहीं है। इधर, लोनिवि (विश्व बैंक) के ईई राजेंद्र चौहान का कहना है कि आगामी वर्ष मई माह तक बोरागाड़ में झूला पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। पुल के निर्माण में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। अभियंताओं की ओर से लगातार निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया जा रहा है।
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